भारत के लिए राहत: ईरान से सुरक्षित गुजरी एलपीजी टैंकर की यात्रा
मध्य पूर्व में तनाव के बीच राहत की खबर
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। भारतीय ध्वज वाला सातवां एलपीजी टैंकर, जिसे 'ग्रीन सानवी' कहा जाता है, सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गया है। इस दौरान, ईरान ने भारत के लिए एक विशेष संदेश जारी किया, जिसमें दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया गया। यह घटना तब हुई है जब वैश्विक तेल आपूर्ति संकट का सामना कर रहा है और कई जहाज अभी भी फंसे हुए हैं।
ऐतिहासिक संबंधों की पुष्टि
ईरान के मुंबई स्थित वाणिज्य दूतावास ने अपने संदेश में कहा, 'भारत, विशेषकर गुजरात, हमारे साझा इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है; क्योंकि सदियों पहले इन्होंने हमारे देश से आए लोगों का स्वागत किया था।' ईरान ने यह भी कहा, 'इस अटूट सभ्यतागत बंधन को ध्यान में रखते हुए, हम मित्रता और सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'
प्राचीन व्यापारिक संबंधों की याद
ईरान ने भारत, विशेषकर गुजरात, को साझा इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। यह बयान प्राचीन लोथल बंदरगाह की याद दिलाता है, जो हजारों साल पहले भारत और फारस के बीच व्यापार का प्रमुख केंद्र था।
रणनीतिक सहयोग की पुष्टि
ईरान ने अपने संदेश में कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल ऐतिहासिक नहीं हैं, बल्कि भविष्य में भी दोस्ती और सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता बनी रहेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने कूटनीति के माध्यम से अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है।
ऊर्जा संकट के बीच राहत
ग्रीन सानवी टैंकर में 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई थी। अब तक छह अन्य जहाज भी सुरक्षित रूप से भारत पहुंच चुके हैं, जबकि लगभग 17 भारतीय जहाज अभी भी होर्मुज के पश्चिम में फंसे हुए हैं। इस संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं।
सरकार ने अफवाहों का खंडन किया
केंद्र सरकार ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि भारत के लिए भेजा गया ईरानी तेल चीन को मोड़ दिया गया। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है और भुगतान में कोई समस्या नहीं है।
