भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 7.052 अरब डॉलर की कमी
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का खुलासा
भारतीय रिजर्व बैंक ने साझा किए आंकड़े, लगातार दूसरे सप्ताह में आई गिरावट
वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की आपूर्ति में रुकावट और भारतीय रुपये की कमजोर स्थिति के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पूंजी निकालने में लगे हुए हैं। इस वजह से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह कमी आई है। यह भंडार 27 फरवरी को 728.494 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 7.052 अरब डॉलर घटकर 709.759 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब भंडार में कमी दर्ज की गई है।
पिछले सप्ताह का विदेशी मुद्रा भंडार
पिछले सप्ताह में कुल भंडार 11.683 अरब डॉलर घटकर 716.81 अरब डॉलर हो गया था। हालांकि, 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में यह 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। केंद्रीय बैंक के अनुसार, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह के लिए विदेशी मुद्रा संपत्ति में कमी आई है, जो भंडार का एक महत्वपूर्ण घटक है। विदेशी मुद्रा संपत्ति 7.678 अरब डॉलर घटकर 555.568 अरब डॉलर रह गई।
भारतीय रुपये की कमजोरी
शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 64 पैसे गिरकर 93.53 के अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। विदेशी कोषों की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.92 पर खुला और जल्द ही 93 के स्तर को पार कर गया। पूरे सत्र के दौरान इसमें गिरावट जारी रही और अंततः यह पिछले बंद भाव से 64 पैसे गिरकर 93.53 पर बंद हुआ।
भू-राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी कोषों की निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपये में गिरावट आई है। भू-राजनीतिक अस्थिरता अल्पकालिक धारणा के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। इस बीच, छह मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.37 फीसदी बढ़कर 99.60 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.03 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 108.62 डॉलर प्रति बैरल पर था। इन सभी कारकों ने रुपये पर भारी दबाव डाला।
