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भारत को मिली बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला LPG टैंकर

भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले LPG टैंकर 'शिवालिक' से राहत मिली है। इस टैंकर में 46 हजार मीट्रिक टन गैस है, जो घरेलू उपयोग के लिए आवश्यक है। इसके बाद दूसरा टैंकर 'नंदा देवी' भी आने वाला है। यह स्थिति देश में गैस की कमी को कम करने में मदद करेगी। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और कैसे यह भारत के लिए एक कूटनीतिक सफलता है।
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भारत को मिली बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला LPG टैंकर

नई दिल्ली में राहत की खबर


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का गुजरना कठिन हो गया था। कई देशों के जहाज फंस गए थे, लेकिन भारत के दो एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित निकलने की अनुमति मिली। इनमें से पहला टैंकर 'शिवालिक' 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया है। यह खबर उन लोगों के लिए राहत की है जो देश में एलपीजी गैस की कमी का सामना कर रहे हैं।


शिवालिक की सफल यात्रा

शिवालिक टैंकर में लगभग 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी गैस लदी हुई है, जो करीब 32-35 लाख घरेलू सिलेंडरों के बराबर है। यह जहाज कतर से लोड होकर आया था और होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गया था। 14 मार्च को ईरान की ओर से रास्ता मिलने के बाद यह सुरक्षित भारत पहुंचा। शाम करीब 5 बजे मुंद्रा पोर्ट पर लंगर डाला गया। अब यहां से गैस की उतराई शुरू होगी, जिससे देश में सिलेंडर की कमी कम होने की उम्मीद है।




ईरान ने भारत को मित्र बताते हुए कहा कि होर्मुज उसके दुश्मनों को छोड़कर बाकी सभी के लिए खुला है। भारतीय विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। भारतीय नौसेना ने भी जहाजों की सुरक्षा में सहायता की।


नंदा देवी का आगमन

नंदा देवी नामक दूसरा टैंकर भी होर्मुज पार कर चुका है, जिसमें भी लगभग 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लदी है। यह जहाज 17 मार्च को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय नौसेना इसे एस्कॉर्ट कर रही है ताकि कोई खतरा न हो। दोनों जहाजों से कुल मिलाकर 92 हजार टन से अधिक गैस आएगी, जो घरेलू उपयोग के लिए अत्यंत आवश्यक है।


हाल के दिनों में देश में एलपीजी सिलेंडर की कमी की शिकायतें बढ़ी थीं। ऐसे में इन जहाजों का आना समय पर राहत प्रदान करेगा। सरकार ने ईरान से बातचीत कर अन्य जहाजों के लिए भी रास्ता बनाने की कोशिश की है। कुल मिलाकर, यह एक कूटनीतिक सफलता है कि युद्ध के बीच भी भारत को ईंधन मिल रहा है। अब उम्मीद है कि जल्द ही बाजार में गैस की उपलब्धता सामान्य हो जाएगी।