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भारत-चीन संबंधों में नई दिशा: क्या बदलेंगे निवेश के नियम?

भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। भारत सरकार चीनी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रही है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है। प्रधानमंत्री मोदी का आगामी चीन दौरा और नीति आयोग के सुझावों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। जानें इस विषय पर और क्या हो सकता है आगे।
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भारत-चीन संबंधों में नई दिशा: क्या बदलेंगे निवेश के नियम?

भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा

India China Relations: भारत सरकार चीन से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) पर लागू कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रही है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवश्यक हुआ, तो भारत 'प्रेस नोट 3' की समीक्षा कर सकता है, जिससे चीन से निवेश के नियमों में बदलाव संभव है।


बातचीत और सहयोग में वृद्धि

हाल ही में भारत और चीन के बीच कई दौर की बातचीत और आधिकारिक दौरे हुए हैं, जिससे सीमा विवादों में कमी आई है और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किया गया है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ जैसे कारकों ने भी दोनों देशों के बीच की दूरी को कम करने में मदद की है।


रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया

ट्रंप प्रशासन के 'टैरिफ युद्ध' के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार देखा गया है। नई दिल्ली और बीजिंग के बीच मंत्रियों और अधिकारियों के दौरे बढ़े हैं। दोनों देशों ने सीमाओं पर शांति बनाए रखने, सीधी उड़ानों की शुरुआत, और सीमा विवादों के समाधान के लिए बातचीत तेज करने पर सहमति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा 27 अगस्त 2025 से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत और चीन के बीच की दूरी कम हुई है।


प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शिखर बैठक के लिए चीन का दौरा करेंगे। यह उनका सात वर्षों में पहला चीन दौरा होगा, जहां वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आमने-सामने बातचीत करेंगे।


प्रेस नोट 3: नियमों की जानकारी

प्रेस नोट 3 के तहत भारत के साथ साझा सीमाओं वाले देशों से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। यह नियम अप्रैल 2020 में लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों को अवसरवादी अधिग्रहण से बचाना था। यह कदम खासकर सीमा पर तनाव के बाद चीन से निवेश को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया था।


नीति आयोग का सुझाव

नीति आयोग ने पिछले महीने सुझाव दिया कि चीन से 24 प्रतिशत तक के FDI के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी की शर्त को हटा दिया जाए। इससे चीनी कंपनियों को भारतीय कंपनियों में 24 प्रतिशत तक निवेश करने के लिए पूर्व-मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी, जो भारत में चीनी निवेश को बढ़ावा दे सकता है।


मंत्री पीयूष गोयल का बयान

ET वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस नोट 3 की आवश्यकता पर कहा कि यह नियम उस समय जरूरी था और भारत के रणनीतिक हितों से जुड़ा था। यह FDI पर रोक नहीं है, बल्कि पूर्व-मंजूरी की शर्त है और कई कंपनियों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति के आधार पर ही वह टिप्पणी कर सकते हैं और समय के साथ इस नीति में बदलाव संभव है।