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भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत: भाजपा और CPC के बीच पहली औपचारिक बैठक

भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच, भाजपा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के बीच पहली औपचारिक बैठक हुई है। इस बैठक में दोनों पक्षों ने संवाद को बढ़ावा देने और भविष्य में विचार-विमर्श के अवसरों पर चर्चा की। कांग्रेस ने इस बैठक पर कड़ा विरोध जताया है, आरोप लगाते हुए कि भाजपा चीन के संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्य के बावजूद बातचीत कर रही है। जानें इस बैठक का महत्व और इसके पीछे की राजनीति।
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भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत: भाजपा और CPC के बीच पहली औपचारिक बैठक

भारत-चीन संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़


2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया था। इसी संदर्भ में, सोमवार को एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली में अपने मुख्यालय में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक चर्चा की। यह बैठक गलवान संघर्ष के बाद दोनों दलों के बीच पहली आधिकारिक बातचीत मानी जा रही है।


बैठक में शामिल प्रमुख व्यक्ति

भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा की कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हैयान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा मुख्यालय का दौरा किया। भाजपा की ओर से इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने किया। इस बैठक में भारत में चीन की राजदूत शू फेइहोंग भी उपस्थित थीं। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने संवाद को बढ़ावा देने, आपसी संपर्क बनाए रखने और भविष्य में विचार-विमर्श के अवसरों पर चर्चा की।


पुराने संबंधों का नया संदर्भ

भाजपा और सीपीसी के बीच संवाद कोई नई बात नहीं है। 2000 के दशक के अंत से दोनों दलों के बीच बातचीत होती रही है, और भाजपा के कई प्रतिनिधिमंडल पहले भी बीजिंग जाकर चीनी नेताओं से मिल चुके हैं। लेकिन गलवान घाटी की घटना के बाद यह पहला अवसर है जब दोनों पक्ष औपचारिक रूप से आमने-सामने आए हैं।


यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य वापसी और राजनयिक बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशें तेज हुई हैं।


कांग्रेस का विरोध

इस बैठक को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एक ओर चीन भारत के संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कर रहा है, जबकि दूसरी ओर भाजपा उसके राजनीतिक दल के साथ बातचीत कर रही है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने आरोप लगाया कि चीन जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर दावा करता है और वहां सीपीईसी के नाम पर निर्माण कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि लद्दाख के बाद चीन अब और अंदर कैसे पहुंच गया, और इस पर सरकार चुप क्यों है।


भाजपा और कांग्रेस के बीच पुरानी तनातनी

यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब भाजपा और कांग्रेस पहले से ही चीन को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाती रही हैं। भाजपा ने कई बार कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 2018 में चीन यात्रा के दौरान सीपीसी के साथ कथित गुप्त समझौते का आरोप लगाया है। इसके अलावा, 2017 के डोकलाम विवाद के दौरान चीनी अधिकारियों से मुलाकात के दावों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें कांग्रेस ने खारिज किया है।