भारत ने अमेरिका से सैन्य सहयोग के दावे को किया खारिज
विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
नई दिल्ली - विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमले के लिए सैन्य सहायता मांगी है। मंत्रालय ने इसे "झूठा, भ्रामक और मनगढ़ंत" करार देते हुए लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। साथ ही, ‘फेक न्यूज़ अलर्ट’ जारी करते हुए कहा गया, "कृपया सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे निराधार और भ्रामक दावों से सावधान रहें।"
यह दावा एक वायरल पोस्ट के माध्यम से सामने आया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2016 में हुए LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) के तहत अमेरिका पश्चिमी भारत में सैन्य संसाधनों के उपयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। पोस्ट में कोंकण तट के पास किसी संभावित ऑफशोर तैनाती का भी उल्लेख किया गया और इसे अमेरिका-ईरान तनाव से जोड़ा गया।
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत की भूमि या सैन्य सुविधाओं के उपयोग के लिए ऐसी कोई अनुमति न तो मांगी गई है और न ही दी गई है।
गौरतलब है कि LEMOA भारत और अमेरिका के बीच एक लॉजिस्टिक समझौता है, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का उपयोग ईंधन, मरम्मत और आपूर्ति जैसी जरूरतों के लिए कर सकती हैं। लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसका उपयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के माहौल में इस तरह की फेक न्यूज़ तेजी से फैलती है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे में सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करें।
