भारत ने ईरान से कच्चे तेल का आयात फिर से शुरू किया
नई दिल्ली में ऊर्जा बाजार की स्थिति
नई दिल्ली: मध्यपूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इस स्थिति में, भारत ने लगभग सात वर्षों के बाद ईरान से कच्चे तेल का आयात फिर से शुरू किया है। इंडियन ऑयल कॉर्प द्वारा खरीदी गई 'जया' नामक एक बड़ी क्रूड कैरियर, जो भारत के पूर्वी तट की ओर बढ़ रही है, इस सप्ताह के अंत तक पहुंचने की उम्मीद है। यह कदम ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान से तेल आयात की बहाली
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, ने 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था। अब, अमेरिका द्वारा अस्थायी रूप से प्रतिबंधों में ढील देने के बाद, भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने इस अवसर का लाभ उठाया है। रॉयटर्स और शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इंडियन ऑयल ने पहला कार्गो खरीदा है। 'जया' जहाज पहले दक्षिण-पूर्व एशियाई मार्ग से होते हुए चीन के पास गया और अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है।
तेल की आपूर्ति पर तनाव का प्रभाव
होर्मुज स्ट्रेट से लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होती है। हालिया संघर्ष ने इस मार्ग पर जोखिम बढ़ा दिया है, जिसके कारण भारत सहित कई देशों को वैकल्पिक उपायों की तलाश करनी पड़ी। भारत के तेल मंत्रालय ने पुष्टि की है कि रिफाइनर बिना किसी भुगतान बाधा के ईरानी तेल खरीद रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए यह निर्णय ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने और वैश्विक कीमतों की अस्थिरता से बचने के लिए आवश्यक था।
एक और जहाज भारत की ओर
डेटा से यह भी पता चलता है कि 'जॉर्डन' नामक एक और जहाज भी भारत की ओर बढ़ रहा है। यह संकेत है कि आने वाले हफ्तों में भारत को ईरान से और सप्लाई मिल सकती है। भारत को उम्मीद है कि यह अस्थायी राहत ऊर्जा आपूर्ति के दबाव को कम करेगी और घरेलू बाजार को स्थिर रखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम जारी रहता है, तो ईरान से आयात बढ़ने की संभावना और मजबूत होगी।
कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के दाम तेजी से गिर गए। एमसीएक्स पर अप्रैल अनुबंध 18 प्रतिशत तक गिरकर 8,775 रुपये प्रति बैरल पर बंद हुआ। मंगलवार को यह कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। कीमतों में यह गिरावट तेल आयातक देशों, विशेषकर भारत के लिए राहत मानी जा रही है।
