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भारत ने चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगाई

भारत सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम वैश्विक बाजार में सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत अब तक का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है, और इस निर्णय से ब्राजील और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धियों को लाभ मिल सकता है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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भारत ने चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगाई

महंगाई पर नियंत्रण के लिए उठाया गया कदम


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और देश में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में, भारत सरकार ने सोने और चांदी के आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया। इसके साथ ही, चीनी के निर्यात पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह रोक 30 सितंबर तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी।


निषेधात्मक नीति का कार्यान्वयन

इस संबंध में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होगा। सरकार ने चीनी को निषिद्ध श्रेणी में डालते हुए कहा है कि यह प्रतिबंध मौजूदा टैरिफ-दर कोटा और व्यवस्थाओं के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को चीनी निर्यात पर लागू नहीं होगा।


भारत का वैश्विक स्थान

रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने स्थानीय कीमतों को स्थिर रखने के लिए चीनी निर्यात पर यह प्रतिबंध लगाया है। यह कदम वैश्विक सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है। इससे ब्राजील और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धी उत्पादकों को एशियाई और अफ्रीकी बाजारों में अधिक शिपमेंट भेजने का अवसर मिलेगा। भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है।


उत्पादन में कमी

केंद्र सरकार ने पहले 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन अब उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम रहने की संभावना है। प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार में कमी आई है। अल नीनो मौसम की स्थिति इस वर्ष के मानसून को प्रभावित कर सकती है, जिससे अगले सीजन का उत्पादन प्रारंभिक अनुमानों से कम रहने का खतरा बढ़ गया है।


वर्तमान स्थिति

निर्यात के लिए स्वीकृत 1.59 मिलियन टन में से व्यापारियों ने लगभग 800,000 टन के अनुबंध किए थे, जिसमें से 600,000 टन से अधिक चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। हालांकि, सरकार ने कच्ची और सफेद चीनी के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही है। लेकिन निर्यात पाइपलाइन में पहले से मौजूद शिपमेंट को कुछ शर्तों के तहत आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।