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भारत ने नागोया प्रोटोकॉल के तहत वैश्विक प्रमाणपत्रों में शीर्ष स्थान हासिल किया

भारत ने नागोया प्रोटोकॉल के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्रों में 56% हिस्सेदारी के साथ पहला स्थान हासिल किया है। एबीएस क्लियरिंग-हाउस के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 3,561 आईआरसीसी जारी किए हैं, जो अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक हैं। इस उपलब्धि के पीछे भारत की जैव विविधता अधिनियम, 2002 का प्रभावी ढांचा है, जिसने पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया है। जानें इस सफलता के पीछे के कारण और भारत की वैश्विक स्थिति के बारे में।
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भारत ने नागोया प्रोटोकॉल के तहत वैश्विक प्रमाणपत्रों में शीर्ष स्थान हासिल किया

भारत की वैश्विक उपलब्धि

नई दिल्ली: नागोया प्रोटोकॉल (ABS) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (IRCC) जारी करने में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अब भारत इस क्षेत्र में अग्रणी देश बन गया है। एबीएस क्लियरिंग-हाउस द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी किए गए सभी प्रमाणपत्रों में से 56 प्रतिशत से अधिक भारत ने ही जारी किए हैं। भारत ने कुल 6,311 वैश्विक प्रमाणपत्रों में से 3,561 आईआरसीसी जारी कर अन्य देशों को पीछे छोड़ दिया है।


अन्य देशों की स्थिति

फ्रांस और स्पेन जैसे विकसित देश भी पीछे रह गए


एबीएस क्लियरिंग-हाउस पर कुल 142 देशों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से केवल 34 देशों ने ही आईआरसीसी जारी करने में सफलता प्राप्त की है। भारत पहले स्थान पर है, जबकि फ्रांस ने 964 प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इसके बाद स्पेन (320), अर्जेंटीना (257), पनामा (156) और केन्या (144) का स्थान है। यह आंकड़ा भारत की जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के पारदर्शी उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


नागोया प्रोटोकॉल और आईआरसीसी की जानकारी

नागोया प्रोटोकॉल और आईआरसीसी क्या हैं?


नागोया प्रोटोकॉल के तहत, उन देशों को आईआरसीसी जारी करना अनिवार्य है जो अपने आनुवंशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच प्रदान करते हैं। ये प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि संसाधनों के उपयोग के लिए पूर्व सूचित सहमति प्राप्त की गई है। सहमति के बाद, सभी विवरण एबीएस क्लियरिंग-हाउस के पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं, जिससे संसाधनों के उपयोग की पूरी जानकारी उपलब्ध रहती है।


भारत की सफलता का कारण

भारत ने यह मुकाम कैसे हासिल किया?


भारत की यह शीर्ष स्थिति जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित प्रभावी ढांचे का परिणाम है। इसे केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य स्तर पर राज्य बोर्डों और स्थानीय स्तर पर प्रबंधन समितियों के माध्यम से लागू किया गया है। भारत की सुव्यवस्थित प्रक्रिया ने न केवल आवेदनों को तेजी से निपटाने में मदद की है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन भी सुनिश्चित किया है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक पर्यावरण समझौतों और जैव विविधता संरक्षण में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है।