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भारत ने पश्चिम एशिया संकट में 1800 से अधिक नाविकों को सुरक्षित निकाला

भारत ने हाल ही में पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के बीच 1800 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद, भारत ने इस क्षेत्र में कूटनीतिक और सुरक्षा उपायों को लागू किया है। विदेश मंत्री का यूएई दौरा और पेट्रोलियम मंत्री का कतर दौरा भी इस रणनीति का हिस्सा हैं। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में अधिक जानकारी।
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भारत ने पश्चिम एशिया संकट में 1800 से अधिक नाविकों को सुरक्षित निकाला

पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति


पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत की सक्रियता


नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हालिया हमलों के बाद, भारत ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार ने इस क्षेत्र में ऊर्जा और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक बहुआयामी रणनीति विकसित की है।


भारत की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के साथ-साथ, कूटनीतिक संवाद और समुद्री सुरक्षा के उपायों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक संकटों से बचाने में मदद की है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविकों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।


इस दौरान, डीजी शिपिंग के माध्यम से 1800 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की गई है, जिनमें से 49 नाविक हाल ही में वापस आए हैं। 5 अप्रैल, 2026 को, भारतीय जहाज 'ग्रीन आशा' सुरक्षित रूप से जेएनपीए पहुंचा।


भारत के विदेश मंत्री का यूएई दौरा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया की घटनाओं पर बारीकी से नजर रख रहा है। इसी संदर्भ में, विदेश मंत्री 11 से 12 अप्रैल 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दौरा करेंगे, जहां दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।


इसके अतिरिक्त, पेट्रोलियम मंत्री 9 और 10 अप्रैल 2026 को कतर का दौरा करेंगे। भारत खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के अन्य देशों के साथ भी संपर्क में है। जायसवाल ने बांग्लादेश के साथ संबंधों पर भी जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भारत का दौरा किया था।