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भारत ने पहलगाम हमले के गुनहगारों को ढेर किया: ऑपरेशन महादेव की सफलता

22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर की बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन महादेव चलाकर तीन आतंकियों को मार गिराया। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इस कार्रवाई की पुष्टि की। जानें इस ऑपरेशन की पूरी कहानी और आतंकियों की पहचान कैसे हुई।
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भारत ने पहलगाम हमले के गुनहगारों को ढेर किया: ऑपरेशन महादेव की सफलता

आतंकवादी हमले का खौफनाक मंजर

22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर की बैसरन घाटी में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया। इस आतंकवादी हमले के प्रतिशोध में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर का आरंभ किया, जिसके तहत 6 से 7 मई की रात को पाकिस्तान में स्थित 9 से अधिक आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया।


ऑपरेशन महादेव: आतंकियों का सफाया

पहलगाम में हुए इस हमले के लगभग दो महीने बाद, भारतीय सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन महादेव चलाया, जिसमें तीनों आतंकियों को मार गिराया गया। यह कार्रवाई 28 जुलाई 2025 को श्रीनगर के बाहरी इलाके हरवान के लिदवास क्षेत्र में की गई।


संसद में गृह मंत्री का बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जानकारी दी कि पहलगाम हमले के दोषियों को समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा संचालित किया गया। सुरक्षा बलों ने आतंकियों को पीर-पांजाल की पहाड़ियों में घेर लिया और उन्हें मार गिराया।


आतंकियों की पहचान

मारे गए तीन आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े थे। इनमें से सुलेमान टॉप का कमांडर था, जो पहलगाम और गगनगीर हमलों का मास्टरमाइंड था। अन्य दो आतंकियों का अफगानिस्तान से संबंध था, जिनमें से एक का नाम हमजा अफगानी और दूसरे का जिब्रान था। ये सभी 'A' श्रेणी के आतंकवादी थे।


आतंकियों की भागने की योजना

तीनों आतंकवादी बैसरन घाटी में निर्दोष लोगों की हत्या में शामिल थे। हमले के अगले दिन सुरक्षा बलों की एक बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि आतंकियों को पाकिस्तान भागने से रोका जाएगा।


आतंकियों का घेराव कैसे हुआ?

मई 2025 में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को दाचीगाम क्षेत्र में आतंकियों की उपस्थिति की सूचना मिली। इसके बाद, IB और सेना ने एक महीने तक ठंडे और ऊंचे इलाकों में सिग्नल कैप्चर करने वाले उपकरणों से जानकारी इकट्ठा की। 22 जुलाई को आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता चला, जिसके बाद CRPF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और 4 पैरा की टीम ने उन्हें घेर लिया और समाप्त कर दिया।


आतंकियों की पहचान की प्रक्रिया

पहलगाम हमले के बाद, एनआईए ने कुछ स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया था, जो आतंकियों को शरण दे रहे थे। जब आतंकियों के शव श्रीनगर लाए गए, तो गिरफ्तार लोगों ने उन्हें पहचाना और बताया कि यही पहलगाम हमले के जिम्मेदार थे।


सुरक्षा बलों ने हमले में इस्तेमाल की गई राइफलों को भी बरामद किया। पहलगाम से मिले खाली कारतूसों की फॉरेंसिक रिपोर्ट की जांच की गई। दाचीगाम से जब्त की गई तीन राइफलों को चंडीगढ़ भेजकर फायरिंग टेस्टिंग की गई, जिसमें कारतूसों का मिलान हुआ। भारत ने दो महीने के भीतर गुनहगारों को समाप्त कर दिया।