भारत ने राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को भेजा लेटर ऑफ रिक्वेस्ट
भारत की वायुसेना की क्षमता में वृद्धि
भारत अपनी वायुसेना की लड़ाकू ताकत को और अधिक सशक्त बनाने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, भारत ने फ्रांस को 114 डसॉल्ट राफेल मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) भेज दिया है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है।
LoR की प्रक्रिया और वार्ता
यह लेटर, जो दो देशों के बीच एक अंतर-सरकारी समझौते का हिस्सा है, फ्रांस को भेजा गया है। इसके बाद, दोनों देशों के बीच विस्तृत वार्ता की प्रक्रिया शुरू होगी। यह जानकारी उस समय आई है जब भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 1 जून से फ्रांस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं।
भारत में विमानों का निर्माण
इस प्रस्तावित समझौते के अनुसार, 114 राफेल विमानों में से लगभग 90 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। यह उत्पादन डसॉल्ट एविएशन और एक भारतीय साझेदार कंपनी के सहयोग से मेक इन इंडिया पहल के तहत होगा। शेष विमानों को फ्रांस से फ्लाई-अवे स्थिति में सीधे भारत भेजा जाएगा।
स्वदेशी सामग्री का उपयोग
इस परियोजना में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग होने की उम्मीद है, जिससे भारत के एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह कदम सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
राफेल विमानों की विशेषताएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, यह खरीद भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगी। राफेल विमानों को विश्व के सबसे उन्नत मल्टी-रोल फाइटर जेट्स में से एक माना जाता है, जो हवाई वर्चस्व, जमीनी हमले, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं।
भारत-फ्रांस रक्षा संबंध
इस सौदे से न केवल भारतीय वायुसेना का लड़ाकू बेड़ा मजबूत होगा, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और रणनीतिक संबंध भी और गहरे होंगे। यह परियोजना देश में अब तक की सबसे बड़ी रक्षा विनिर्माण पहल के रूप में उभर सकती है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि 36 राफेल विमानों की पिछली डील के सफल अनुभव के बाद, अब बड़े पैमाने पर खरीद भारत की हवाई शक्ति को नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
