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भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात किया कम, रिलायंस का बड़ा बयान

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करने की घोषणा की है, जिससे जनवरी में आयात का स्तर कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुँच सकता है। अमेरिका के दबाव के चलते भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी कमी की है। इस स्थिति ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दी है, जबकि चीन अब भी रूस से अधिक मात्रा में तेल खरीद रहा है। जानें इस मुद्दे पर और क्या जानकारी है और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात किया कम, रिलायंस का बड़ा बयान

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूस से तेल खरीदने की पुष्टि की


रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि उसने रूस से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया है।


बिजनेस डेस्क : 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के आरंभ होते ही, रूस ने कई देशों को कच्चे तेल की रियायती दरों पर आपूर्ति का प्रस्ताव दिया था। भारत उन कुछ देशों में से एक था जिसने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।


इसके परिणामस्वरूप, भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा। अब तक, भारत ने रूस से 144 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल खरीदा है। इस दौरान, चीन ने 210.3 अरब यूरो का क्रूड आयात कर सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। हालाँकि, अब अमेरिका के दबाव के चलते भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में भारी कमी की है।


रिलायंस का बयान और उसके प्रभाव

रिलायंस इंडस्ट्री का यह बयान आया सामने


रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुसार, जनवरी में रूस से कच्चे तेल का आयात कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुँच सकता है। कंपनी ने कहा कि उसे जनवरी में रूस से तेल की कोई खेप मिलने की उम्मीद नहीं है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका भारत पर आयात शुल्क बढ़ा सकता है। रिलायंस ने सोशल मीडिया पर बताया कि पिछले तीन सप्ताह से उनकी जामनगर रिफाइनरी में कोई भी रूसी तेल की खेप नहीं आई है।


रिलायंस की स्थिति

रिलायंस ने खरीदा सबसे ज्यादा कच्चा तेल


20 नवंबर, 2025 को रिलायंस ने कहा था कि उसने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का पालन करते हुए अपनी जामनगर रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का उपयोग बंद कर दिया है। रिलायंस भारत में रूस से तेल खरीदने वाली सबसे बड़ी कंपनी थी, जो अपने रिफाइनिंग परिसर में कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में परिवर्तित करती थी।


भारत की चुनौतियाँ


इन खरीदों ने पश्चिमी देशों की कड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, जिन्होंने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाकर उसे निशाना बनाया है। उनका तर्क है कि तेल राजस्व से मॉस्को के युद्ध प्रयासों को वित्त पोषित करने में मदद मिलती है। अमेरिका ने पिछले साल रूसी तेल की भारी खरीद के लिए दंड के रूप में भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क को दोगुना करके 50 फीसदी कर दिया था।


अतिरिक्त जानकारी

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