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भारत ने रूस से तेल खरीद को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका से मांगी छूट बढ़ाने की अनुमति

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अमेरिका से रूस से कच्चे तेल की खरीद पर दी गई छूट को बढ़ाने की मांग की है। वैश्विक तेल आपूर्ति में बढ़ती चिंताओं और मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच, भारत ने यह कदम उठाया है। वर्तमान में, भारतीय रिफाइनरी कंपनियां तेजी से रूसी तेल खरीद रही हैं, और सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि ईंधन की कोई कमी नहीं होगी। जानें इस मुद्दे पर भारत और रूस के बीच बातचीत और इसके वैश्विक प्रभाव के बारे में।
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भारत ने रूस से तेल खरीद को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका से मांगी छूट बढ़ाने की अनुमति

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम


नई दिल्ली: वैश्विक तेल आपूर्ति में बढ़ती चिंताओं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के बीच, भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर लगी समयसीमा समाप्त होने से पहले, भारत ने अमेरिका से प्रतिबंधों में दी गई छूट को बढ़ाने की मांग की है। यदि यह छूट समाप्त होती है, तो इसका प्रभाव केवल भारत पर नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।


अमेरिका से छूट बढ़ाने की मांग

भारत ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, रूसी तेल आयात पर दी गई छूट को आगे बढ़ाया जाए। अमेरिका ने पहली बार मार्च में यह विशेष अनुमति दी थी, ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कमी न हो और कीमतों पर नियंत्रण बना रहे। वर्तमान में यह छूट 16 मई की रात तक लागू है। हालांकि, रूस के तेल पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने भारत सहित कई देशों पर दबाव डाला है कि वे रूस से होने वाली खरीद को कम करें। इसके बावजूद, भारत का कहना है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताएं और स्थिर आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण हैं।


मिडिल ईस्ट संकट का प्रभाव

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता

28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के कारण कई देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। सरकार का मानना है कि ऐसे समय में सस्ती और स्थिर तेल आपूर्ति बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसी कारण भारत रूस से तेल खरीद जारी रखने के पक्ष में है।


रूसी तेल आयात में वृद्धि

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी तेल आयात

छूट समाप्त होने से पहले, भारतीय रिफाइनरी कंपनियां तेजी से रूसी तेल खरीद रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। पूरे महीने का औसत लगभग 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है। हालांकि, भारत ने उन रूसी एलएनजी कार्गो को लेने से इनकार कर दिया है जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। बताया जा रहा है कि इसी कारण रूस से जुड़ा एक एलएनजी शिपमेंट फिलहाल सिंगापुर के पास रुका हुआ है।


भारत और रूस के बीच बातचीत

रूस और भारत के बीच लगातार बातचीत

ऊर्जा सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है। हाल ही में रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन ने नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि जून में फिर दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।


सरकार का आश्वासन

सरकार ने दिया भरोसा, ईंधन की कमी नहीं

केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि फिलहाल ईंधन को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत के पास इस समय 69 दिनों का एलएनजी और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक सुरक्षित है। सरकार ने घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी उत्पादन भी बढ़ा दिया है। पहले जहां रोजाना 36 हजार टन उत्पादन हो रहा था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 54 हजार टन कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में भी देश में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।