भारत ने श्रीलंका को 38,000 टन पेट्रोलियम सहायता भेजी
भारत की सहायता से श्रीलंका को मिली राहत
भारत ने मिडिल ईस्ट संकट के दौरान श्रीलंका को 38,000 टन पेट्रोलियम की आपूर्ति की है। कोलंबो ने इस सहायता के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, इस सहायता में 20,000 टन डीजल और 18,000 टन पेट्रोल शामिल हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत का उल्लेख किया।
भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति का प्रदर्शन
इस अवसर पर, पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे और सांसद नामल राजपक्षे ने कहा कि भारत ने एक बार फिर 'नीबरहुड फर्स्ट' नीति को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी और भारत के लोगों ने समय पर पेट्रोलियम भेजकर यह साबित किया है।" राजपक्षे ने यह भी कहा कि भारत हमेशा संकट के समय श्रीलंका का पहला सहायक रहा है।
रिश्तों की मजबूती संकट में होती है
विपक्षी नेता सजित प्रेमादासा ने भारत को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया, "यह आपात ईंधन सहायता हमें याद दिलाती है कि रिश्तों की परीक्षा संकट में होती है, सुख में नहीं। हमें उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जो हमारे साथ खड़े रहे जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।" उनका यह बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा।
ईरान संघर्ष से आपूर्ति में बाधा
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, पश्चिम एशिया और सिंगापुर के आपूर्तिकर्ताओं ने 'फोर्स मेज्योर' लागू कर दी थी। जहाजों की अनुपलब्धता और संघर्ष के कारण ईंधन की नियमित डिलीवरी में रुकावट आई थी। इसी कारण श्रीलंका को भारत से तत्काल सहायता की आवश्यकता पड़ी। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा ने 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी से बात की थी।
श्रीलंका में भारत की टैक्स नीति अपनाने की मांग
नामल राजपक्षे ने श्रीलंका सरकार से अनुरोध किया कि वह भारत के हाल के ईंधन टैक्स मॉडल को अपनाए। उन्होंने कहा कि भारत ने एक्साइज ड्यूटी को इसीलिए कम किया ताकि कीमतें तुरंत न घटें, बल्कि वैश्विक तेल संकट के दौरान बाजार स्थिर रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सुधार के श्रीलंका भविष्य में भी ऐसे संकटों का सामना करता रहेगा।
