भारत पर अमेरिकी टैरिफ: व्यापार वार्ता में जटिलताएँ और चेतावनियाँ
भारत से आयातित वस्तुओं पर 50% अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद, अमेरिकी आर्थिक सलाहकार ने भारत को चेतावनी दी है कि यदि वह रूस के साथ अपने कच्चे तेल के व्यापार को नियंत्रित नहीं करता है, तो अमेरिका टैरिफ में कोई ढील नहीं देगा। व्यापार वार्ता को जटिल बताते हुए, उन्होंने भारत पर अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने में अड़ियल रवैया अपनाने का आरोप लगाया। इस लेख में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की चुनौतियों और उच्च टैरिफ के कारणों पर चर्चा की गई है।
Aug 28, 2025, 18:10 IST
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अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव
भारत से आयातित वस्तुओं पर 50% का अमेरिकी टैरिफ लागू होने के एक दिन बाद, राष्ट्रपति के प्रमुख आर्थिक सलाहकार ने चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस के साथ अपने कच्चे तेल के व्यापार को नियंत्रित नहीं करता है, तो अमेरिका भारतीय आयातों पर दंडात्मक टैरिफ में कोई ढील नहीं देगा। अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने नई दिल्ली के साथ व्यापार वार्ता को 'जटिल' बताया और भारत पर अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने में 'अड़ियल' रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
भारत की स्थिति पर अमेरिकी प्रतिक्रिया
हैसेट ने कहा कि यदि भारत अपने रुख में बदलाव नहीं लाता है, तो राष्ट्रपति ट्रम्प भी झुकने के लिए तैयार नहीं होंगे। अमेरिका ने 27 अगस्त को भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया, जो ब्राजील के अलावा किसी अन्य देश के लिए सबसे अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता जटिल है, जिसका एक कारण रूस पर अमेरिका का दबाव है, जो शांति समझौते के लिए आवश्यक है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की चुनौतियाँ
केविन हैसेट ने व्यापार वार्ता को एक मैराथन बताया
हैसेट ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को एक मैराथन के रूप में वर्णित किया, जिसमें दीर्घकालिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ताओं में उतार-चढ़ाव आते हैं और अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले धैर्य रखना आवश्यक है।
स्कॉट बेसेंट की टिप्पणियाँ
उच्च टैरिफ के कारण
ट्रम्प के सलाहकार का यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की पूर्व टिप्पणियों की याद दिलाता है। बेसेंट ने कहा था कि भारत पर उच्च टैरिफ केवल रूस से तेल की खरीद के कारण नहीं हैं, बल्कि व्यापार समझौते की लंबी बातचीत के कारण भी हैं। उन्होंने फॉक्स बिज़नेस को बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि मई या जून में कोई समझौता हो जाएगा, लेकिन बातचीत में देरी हो गई है।