भारत मंडपम में चुनाव आयोग का ऐतिहासिक सम्मेलन
राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन की शुरुआत
भारत मंडपम में मंगलवार को चुनाव आयोग और सभी राज्यों के निर्वाचन आयुक्तों का एक राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन आरंभ हुआ। यह बैठक 27 वर्षों के बाद आयोजित की जा रही है, पिछली बार ऐसा सम्मेलन 1999 में हुआ था।
इस सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कर रहे हैं। इस अवसर पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ इस बैठक में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी सम्मेलन में शामिल हुए हैं।
सम्मेलन की शुरुआत में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और चर्चा की दिशा निर्धारित की। इस दौरान आयोग ने 'लोकतंत्रों का संगम' नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि देश के हित और संवैधानिक समन्वय के लिए चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को मतदाताओं के हित में मिलकर कार्य करना चाहिए।
यह सम्मेलन चुनाव प्रबंधन से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के उपयोग, उसकी पारदर्शिता और सुरक्षा विशेषताओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी जा रही है। इसके साथ ही नई डिजिटल प्रणाली 'ईसीआईनेट' पर भी विशेष प्रस्तुति दी गई है, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।
बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता पात्रता से जुड़े प्रावधानों की तुलनात्मक प्रस्तुति भी की जा रही है। यह चर्चा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के संदर्भ में मतदाता सूची की तैयारी और संशोधन की कानूनी प्रक्रिया को बेहतर समझने के लिए की जा रही है। चुनावी सूची की सटीकता और मजबूती बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हो रहा है।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर के निर्वाचन संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत करना और सहकारी संघवाद की भावना को सुदृढ़ करना है।
राज्य निर्वाचन आयोगों का गठन संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के तहत किया गया था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243के और 243जेडए के अनुसार, ये आयोग पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
