भारत में अल नीनो का प्रभाव: सूखा और गर्मी की आशंका
अमेरिकी मौसम एजेंसी का अनुमान
अमेरिकी मौसम एजेंसी नोआ ने जताया अनुमान
भारत में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना के बीच, मॉनसून को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। अमेरिकी मौसम एजेंसी नोआ के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, प्रशांत महासागर में तापमान में तेजी से वृद्धि के कारण अल नीनो मई से जुलाई के बीच अपेक्षा से पहले ही सक्रिय हो सकता है।
नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (नोआ) ने बताया कि इस बार प्रशांत महासागर का तापमान मई में सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक है। यह गर्मी पूरे मानसून सीजन में बनी रह सकती है। पिछले महीने की रिपोर्ट में इसकी संभावना 61% थी, जो अब बढ़कर 82% हो गई है। भारतीय मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि इसका सीधा प्रभाव मानसून की वर्षा पर पड़ेगा, जिससे सूखे का खतरा और बढ़ जाएगा।
अल-नीनो की संभावना और वैश्विक प्रभाव
अल-नीनो की संभावना 82% बढ़ी, दुनिया पर असर
नोआ के नवीनतम अपडेट के अनुसार, इस वर्ष मई से जुलाई के बीच सुपर अल नीनो के विकसित होने की संभावना 82% है। इसके प्रभाव सर्दियों (दिसंबर 2026 से फरवरी 2027) तक जारी रहने की 96% संभावना है। इसके मजबूत या अत्यधिक मजबूत रहने की संभावना लगभग 67% है। इससे कमजोर मानसून, सूखे और हीटवेव की आशंका बढ़ गई है।
अल-नीनो का प्रभाव
अल-नीनो क्या होता है
अल नीनो के कारण समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे वायुमंडलीय पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर वर्षा के चक्र को प्रभावित करता है। कुछ क्षेत्रों में भयंकर सूखा तो कुछ में मूसलधार बारिश और बाढ़ आती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो यह प्रशांत महासागर से भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देता है, जिससे वर्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
