भारत में अवैध घुसपैठ: चुनौतियाँ और सरकार की रणनीतियाँ
अवैध घुसपैठ का मुद्दा
चुनाव चाहे असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड या महाराष्ट्र में हो, अवैध घुसपैठ का विषय हमेशा चर्चा में रहता है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को कई बार इस समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि पूर्वोत्तर में 2014 से पहले की कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों पर भी आरोप लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बांग्लादेशी मुसलमानों को संरक्षण दिया और उन्हें पश्चिम बंगाल में बसाया।
घुसपैठ का इतिहास
भारत में घुसपैठ की समस्या 1947 से शुरू हुई। जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तान से घुसपैठ की कोशिशें होती रहती हैं, लेकिन वहां सुरक्षा के कारण यह समस्या उतनी गंभीर नहीं है जितनी पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल में। केंद्र सरकार का कहना है कि म्यांमार से आए रोहिंग्या, मिजो और कुकी समुदाय की उपजातियाँ और बांग्लादेशी नागरिक भारत के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
घुसपैठ के स्रोत
भारत में घुसपैठ बांग्लादेश, पाकिस्तान और म्यांमार की सीमाओं से होती है। पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मिजोरम के सीमावर्ती क्षेत्र सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी है, इसलिए वहां घुसपैठ की घटनाएँ कम होती हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा का कहना है कि अवैध घुसपैठ के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या संतुलन बदल रहा है।
भारत की चिंताएँ
हिमंता बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम:
पश्चिम बंगाल की जीत भारत की जीत है। हमारी सुरक्षा और जनसंख्यात्मक संतुलन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। ममता बनर्जी ने फेंसिंग के लिए जमीन नहीं दी।
हिमंता बिस्व सरमा ने कहा है कि अवैध घुसपैठ के कारण बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या बढ़ रही है, जिससे हिंदुओं की जनसंख्या पर खतरा मंडरा रहा है।
सरकार की योजनाएँ
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार ने जनसंख्यात्मक परिवर्तन पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा और जनसंख्यात्मक संतुलन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
म्यांमार से घुसपैठ की स्थिति
भारत अब म्यांमार पर नजर रख रहा है। म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का भारत दौरा 30 मई से 3 जून 2026 तक होगा। इस यात्रा के दौरान सीमा प्रबंधन और तस्करी पर चर्चा की जाएगी।
FMR पर सख्ती की आवश्यकता
असम और मिजोरम के मुख्यमंत्री अवैध घुसपैठ पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। म्यांमार से लोग भागकर मिजोरम आते हैं, जहां का 'फ्री मूवमेंट रिजीम' भारत के लिए चुनौती बन रहा है।
सरकार की कार्रवाई
पश्चिम बंगाल सरकार ने होल्डिंग सेंटर बनाने के बाद घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि जो लोग बॉर्डर पर इकट्ठा हैं, वे खुद बांग्लादेश लौटना चाहते हैं।
सीमा सुरक्षा के उपाय
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश सीमा से सटी जमीन को केंद्र सरकार को सौंपने का निर्णय लिया है। इससे घुसपैठ को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।
घुसपैठियों की पहचान और वापसी
पश्चिम बंगाल सरकार ने डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति की घोषणा की है। इसके तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में न आने वाले सभी लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा।
