भारत में ऊर्जा भंडार की स्थिति: ईरान युद्ध का प्रभाव
भारत का ऊर्जा भंडार सुरक्षित
नई दिल्ली - ईरान में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित प्रभावों के बीच, भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है। इसके साथ ही, तेल कंपनियां खाड़ी क्षेत्र के बाहर से आयात बढ़ाकर आपूर्ति में कमी को पूरा कर रही हैं।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में भारत ऊर्जा आपूर्ति के मामले में एक सुरक्षित स्थिति में है। उन्होंने कहा कि हमारे पास होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भंडार से कहीं अधिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि देश में कच्चे तेल, तेल उत्पादों और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है, और आवश्यकता पड़ने पर अन्य देशों से आयात बढ़ाकर आपूर्ति की कमी को पूरा किया जाएगा।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, जब रूस का कुल आयात में हिस्सा केवल 0.2 प्रतिशत था। अब यह तेजी से बढ़कर फरवरी में लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें भारत ने रूस से लगभग 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया।
सरकारी अधिकारी ने एमआरपीएल रिफाइनरी के बंद होने की खबरों को गलत बताया और कहा कि रिफाइनरी में पर्याप्त स्टॉक है। सभी एलपीजी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार है, जिससे उपभोक्ताओं को किसी कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अधिकारी ने बताया कि सरकार जरूरत पड़ने पर पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उपयोग घरेलू मांग को पूरा करने के लिए करेगी। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन अधिकतम करें।
रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी महत्वपूर्ण गैसों का प्राथमिकता से उपयोग करने के लिए कहा गया है, ताकि घरेलू रसोई गैस की कमी न हो। युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों पर असर पड़ा है, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
