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भारत में खाद्यान्न भंडार: मानकों से तीन गुना अधिक

भारत में खाद्यान्न भंडार की स्थिति अत्यंत मजबूत है, जो निर्धारित मानकों से तीन गुना अधिक है। वर्तमान में, देश में 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध हैं। सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि खाद्य सुरक्षा की स्थिति स्थिर है, जबकि वैश्विक आपूर्ति संकट के बीच खाद्य तेलों का आयात भी स्थिर बना हुआ है। जानें इस स्थिति के पीछे की वजहें और सरकार की तैयारियाँ।
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भारत में खाद्यान्न भंडार: मानकों से तीन गुना अधिक

खाद्यान्न भंडार की स्थिति


वर्तमान में 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध


भारत में खाद्यान्न भंडार (बिजनेस डेस्क): पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच, केंद्र सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि देश में खाद्यान्न का भंडार न केवल पर्याप्त है, बल्कि यह वास्तविक आवश्यकता से तीन गुना अधिक है। वैश्विक आपूर्ति संकट के बावजूद, भारत की खाद्य सुरक्षा स्थिति मजबूत बनी हुई है।


खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा के अनुसार, देश में गेहूं और चावल का भंडार निर्धारित मानकों से तीन गुना अधिक है। वर्तमान में, सरकार के पास 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 380 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध है, जिससे कुल खाद्यान्न भंडार 602 मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है।


यह विशाल भंडार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के साथ-साथ किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, इंडोनेशिया, मलेशिया, रूस, यूक्रेन, अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे प्रमुख देशों से खाद्य तेलों का आयात स्थिर बना हुआ है, और घरेलू स्तर पर सरसों के बेहतर उत्पादन ने भी आपूर्ति को मजबूत किया है।


सरकार की निगरानी

पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट ने वैश्विक ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। हालांकि, पेट्रोलियम, नौवहन और खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत सरकार का समन्वित दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं की सुरक्षा में प्रभावी साबित हो रहा है। सरकार स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है।


उर्वरक संयंत्रों की गैस आपूर्ति

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाकर उनकी मांग का लगभग 90 प्रतिशत कर दिया गया है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पहले उर्वरक (यूरिया) संयंत्रों को गैस आपूर्ति उनकी आवश्यकता के लगभग 60 प्रतिशत तक सीमित कर दी गई थी। वैकल्पिक व्यवस्थाओं से इसे 75-80 प्रतिशत तक बढ़ाया गया था। अब, छह महीने की औसत खपत के 90 प्रतिशत तक आपूर्ति आज से स्पॉट खरीद का उपयोग करके बढ़ाई गई है।


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