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भारत में गर्मी का रिकॉर्ड और सुपर अल-नीनो की चेतावनी

भारत में इस समय गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले महीनों में एक शक्तिशाली अल-नीनो घटना हो सकती है, जिसे 'सुपर अल-नीनो' कहा जा रहा है। विश्व मौसम संगठन ने चेतावनी दी है कि यह घटना भारत में मानसून को प्रभावित कर सकती है। जानें इस गर्मी के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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भारत में गर्मी का रिकॉर्ड और सुपर अल-नीनो की चेतावनी

भारत में गर्मी का प्रकोप


भारत इस समय दुनिया के सबसे गर्म देशों में पहले स्थान पर है। अप्रैल में जून जैसी गर्मी के चलते लोग बीमार पड़ने लगे हैं। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 95 शहर दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में शामिल हैं।


गर्मी के कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव के कारण यह असामान्य गर्मी उत्पन्न हो रही है। जबकि विश्व के अन्य हिस्सों में तापमान अपेक्षाकृत ठंडा है, भारत में गर्मी इतनी अधिक है कि लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है।


सुपर अल-नीनो की संभावना

क्या आने वाला है सुपर अल-नीनो?


मौसम वैज्ञानिकों के मॉडल संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में एक अत्यधिक शक्तिशाली अल-नीनो घटना उत्पन्न हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे 'सुपर अल-नीनो' या 'गॉडजिला अल-नीनो' के नाम से भी जानते हैं। ब्रिटेन के मौसम विभाग के एडम स्केफ ने बताया कि पिछले एक महीने में ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में तापमान में जो वृद्धि हुई है, वह इस सदी में अभूतपूर्व है।


विश्व मौसम संगठन की चेतावनी

विश्व मौसम संगठन ने दी चेतावनी


विश्व मौसम संगठन ने अप्रैल 2026 में चेतावनी जारी की है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अल-नीनो की शुरुआत हो सकती है, और यह धीरे-धीरे मजबूत होता जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की सतह का तापमान अभी औसत के आसपास है, लेकिन आंतरिक जल पहले से ही गर्म हो चुका है। अल-नीनो और ला नीना पृथ्वी की सबसे बड़ी प्राकृतिक जलवायु घटनाओं में से हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से एन्सो यानी अल-नीनो-सदर्न ऑसिलेशन कहा जाता है।


अल-नीनो तब बनता है जब मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। सामान्य स्थिति में, पूर्वी प्रशांत में ठंडा पानी ऊपर आता रहता है और हवा पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। अल-नीनो के दौरान, हवा कमजोर पड़ जाती है या दिशा बदल जाती है, जिससे गर्म पानी फैल जाता है। इससे वैश्विक स्तर पर हवा और वर्षा का पैटर्न बदल जाता है। भारत में मानसून कमजोर होने की आशंका है, जिससे कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। यदि यह अल-नीनो सुपर स्तर का हुआ, तो भारत में मानसून की बारिश अनियमित हो सकती है।