भारत में चीनी सीसीटीवी कैमरों पर लगेगा प्रतिबंध, सुरक्षा को लेकर उठाए जाएंगे कदम
नई दिल्ली में सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम
नई दिल्ली: भारत में सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे सीसीटीवी कैमरे अब एक गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं। हाल की रिपोर्टों से पता चला है कि देश में स्थापित लाखों सीसीटीवी कैमरे सुरक्षित नहीं हैं। विशेष रूप से, चीन में निर्मित कैमरों की सुरक्षा नीतियों में खामियां और उनके संदिग्ध सॉफ्टवेयर ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को चिंतित कर दिया है। इस स्थिति को देखते हुए, सरकार अब इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की योजना बना रही है।
चीनी ब्रांड्स पर लग सकता है प्रतिबंध
एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से हिकविजन (Hikvision), दहुआ (Dahua) और टीपी-लिंक (TP-Link) जैसे प्रमुख चीनी ब्रांड्स के कैमरों की बिक्री पर भारत में रोक लगाई जा सकती है। ये कंपनियां लंबे समय से भारतीय बाजार में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास आवश्यक सुरक्षा मानकों का सर्टिफिकेशन नहीं है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना परीक्षण और सर्टिफिकेशन के किसी भी विदेशी कैमरे को बाजार में अनुमति नहीं दी जाएगी।
संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा का खतरा
पाकिस्तान तक पहुंच रही थी लाइव फीड
इस कड़े निर्णय के पीछे एक चौंकाने वाला मामला भी है। हाल ही में यह जानकारी सामने आई थी कि देश के कुछ संवेदनशील रेलवे स्टेशनों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड सीधे पाकिस्तान पहुंच रही थी। इस खुलासे ने यह साबित कर दिया कि इंटरनेट से जुड़े ये कैमरे जासूसी का एक आसान साधन बन सकते हैं। इसलिए, अब सरकारी दफ्तरों में केवल पूरी तरह सुरक्षित और भारतीय मानकों द्वारा प्रमाणित कैमरे ही खरीदे जाएंगे।
नए नियमों की आवश्यकता
सर्टिफिकेशन और नए कड़े नियम
नए नियमों के अनुसार, हर सीसीटीवी कैमरे को एक कठोर परीक्षण से गुजरना होगा। इसमें कैमरे के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डेटा स्टोर करने वाले सर्वर की सुरक्षा की गहन जांच की जाएगी। चूंकि अधिकांश कैमरे इंटरनेट से जुड़े होते हैं, इसलिए उनके डेटा को विदेशी सर्वर पर जाने से रोकना सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि, सस्ते कैमरों के हटने से बाजार में कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं, लेकिन यह भारतीय कंपनियों के लिए एक सुनहरा अवसर भी हो सकता है।
पुराने कैमरों की सुरक्षा
पुराने कैमरों का क्या होगा?
सबसे बड़ी चुनौती उन करोड़ों कैमरों की है जो पहले से ही सार्वजनिक स्थानों और घरों में लगे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए कैमरों पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए एक व्यापक सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता है। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध में भी देखा गया है कि कैसे हैकर्स ने सीसीटीवी को हथियार बनाकर लोगों को निशाना बनाया। इसलिए, उपयोगकर्ताओं को अपने कैमरों के पासवर्ड बदलने और सॉफ्टवेयर को अपडेट करते रहने की सलाह दी जाती है ताकि वे जासूसी का शिकार न हों।
