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भारत में डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क में वृद्धि

भारत की सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में वृद्धि की है। यह निर्णय कंपनियों के निर्यात को कम करने और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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भारत में डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क में वृद्धि

सरकार ने बढ़ाया निर्यात शुल्क

नई दिल्ली। भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियों की बढ़ती कमाई पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने निर्यात शुल्क में वृद्धि की है। डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात टैक्स बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एक अधिसूचना जारी करते हुए डीजल पर निर्यात शुल्क को 55.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 42 रुपए प्रति लीटर निर्धारित किया है। ये नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू होंगी।


निर्यात शुल्क बढ़ाने का कारण

सरकार का मानना है कि निर्यात शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य कंपनियों के निर्यात को कम करना और घरेलू बाजार में डीजल और एविएशन फ्यूल की उपलब्धता को बढ़ाना है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के बीच के अंतर का लाभ निर्यातकों को मिल रहा था, जिसे कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इससे घरेलू कीमतों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।


पिछले शुल्क में वृद्धि

केंद्र सरकार ने पहले 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया था। अब 11 अप्रैल को इसमें बड़ी वृद्धि की गई है। ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम एशिया के संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में असामान्य वृद्धि हुई है, फिर भी भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।