भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का आगमन: क्या हैं उनके लक्ष्य?
नई दिल्ली में सर्जियो गोर का स्वागत
नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर शुक्रवार रात नई दिल्ली पहुंचे। 38 वर्षीय गोर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। भारत में कदम रखते ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि दोनों देशों के लिए नए अवसरों की भरपूर संभावनाएं हैं।
कूटनीतिक विवादों के बीच आगमन
कूटनीतिक विवादों के बीच आगमन
सर्जियो गोर का भारत आगमन ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच एक नया कूटनीतिक विवाद उभरा है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने हाल ही में कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पिछले वर्ष इसलिए नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया। भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
टैरिफ और अन्य मुद्दों से बिगड़े रिश्ते
टैरिफ और अन्य मुद्दों से बिगड़े रिश्ते
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के बाद से भारत और अमेरिका के संबंधों में गंभीर तनाव देखा गया है। इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव, ट्रंप के पुराने दावे, अमेरिका की नई आव्रजन नीति और व्यापार से जुड़े मुद्दे भी रिश्तों को प्रभावित कर रहे हैं।
सर्जियो गोर का सफर
सर्जियो गोर का सफर
सर्जियो गोर पहले व्हाइट हाउस में कार्मिक निदेशक के रूप में कार्यरत थे। अगस्त में, राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें भारत में अमेरिका का अगला राजदूत नियुक्त किया। अमेरिकी सीनेट ने अक्टूबर में उनके नाम को मंजूरी दी, जिसके बाद उन्होंने नवंबर में औपचारिक रूप से शपथ ली।
ट्रंप की उम्मीदें
ट्रंप की उम्मीदें
गोर के शपथ ग्रहण के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि सर्जियो गोर भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ट्रंप ने भारत को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारों में से एक बताया।
गोर का भारत के प्रति दृष्टिकोण
गोर का भारत के प्रति दृष्टिकोण
सर्जियो गोर ने अपनी नई जिम्मेदारी को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया है। उन्होंने कहा कि वे भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप के चुनावी अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिससे नए प्रशासन में उनका प्रभाव बढ़ा है।
पहले भी कर चुके हैं भारत दौरा
पहले भी कर चुके हैं भारत दौरा
गौरतलब है कि अक्टूबर में सीनेट से मंजूरी मिलने के कुछ ही दिनों बाद, सर्जियो गोर छह दिनों के लिए भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। इससे पहले, जनवरी में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी के इस्तीफे के बाद यह पद खाली हो गया था।
