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भारत में पहला बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम शुरू, यात्रा होगी तेज और आसान

भारत ने सूरत में पहला बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम शुरू किया है, जो हाईवे यात्रा को तेज और आसान बनाएगा। इस नई प्रणाली के तहत वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस तकनीक को भारत के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। जानें इस प्रणाली के बारे में और कैसे यह यात्रा को सुगम बनाएगी।
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भारत में पहला बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम शुरू, यात्रा होगी तेज और आसान

नई टोलिंग व्यवस्था का आगाज़

सूरत: भारत ने हाईवे यात्रा को और अधिक तेज, सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गुजरात के सूरत में एनएच-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा पर देश का पहला बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम आधिकारिक रूप से लागू किया गया है।


बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम की विशेषताएँ

यह नई प्रणाली पारंपरिक टोल प्लाजा की लंबी कतारों से मुक्ति दिलाएगी और वाहनों को बिना रुके गुजरने की सुविधा प्रदान करेगी।


बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम क्या है?
यह प्रणाली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित है, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होती। पहले जहां बैरियर लगाकर टोल वसूला जाता था, अब वहां हाई-टेक सेंसर और कैमरों से लैस ओवरहेड संरचना के माध्यम से वाहनों की पहचान की जाती है और टोल अपने-आप कट जाता है। इससे समय की बचत होगी और ट्रैफिक जाम तथा ईंधन की खपत में कमी आएगी।


गडकरी का दृष्टिकोण

गडकरी ने बताया भविष्य का रास्ता
इस प्रणाली की शुरुआत की घोषणा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ‘लॉजिस्टिक्स शक्ति समिट एंड अवार्ड्स 2026’ में की थी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भारत के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


FASTag और AI तकनीक का समावेश

FASTag और AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
नई टोलिंग व्यवस्था में FASTag को ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के साथ जोड़ा गया है। AI आधारित कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करते हैं, जबकि RFID रीडर FASTag को पढ़ते हैं। इसके बाद टोल राशि सीधे लिंक्ड बैंक खाते से कट जाती है। यह ड्यूल वेरिफिकेशन सिस्टम सटीकता बढ़ाता है और गड़बड़ी की संभावना को कम करता है।


FASTag के बिना भी टोल वसूली

बिना FASTag भी नहीं बच पाएंगे वाहन
यदि किसी वाहन में FASTag नहीं है या वह निष्क्रिय है, तब भी सिस्टम नंबर प्लेट के माध्यम से पहचान कर लेता है। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित होता है और टोल वसूली में कोई बाधा नहीं आती।


यात्रियों के लिए क्या बदलाव?

क्या बदलेगा आपके लिए?
इस नई तकनीक के कारण हाईवे पर यात्रा पहले से अधिक स्मूद और तेज हो जाएगी। लंबी कतारों, इंतजार और रुकावटों से राहत मिलेगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। कुल मिलाकर, यह कदम भारत के स्मार्ट और डिजिटल हाईवे नेटवर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।