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भारत में पहली बार 182 करोड़ रुपये की कैप्टागन टैबलेट जब्त

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने पहली बार 182 करोड़ रुपये मूल्य की कैप्टागन टैबलेट जब्त की है। इसे 'जिहादी ड्रग' कहा जाता है और यह पश्चिम एशिया के लिए भेजी जा रही थी। इस मामले में एक विदेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। जानें इस ड्रग के बारे में और इसकी जांच की स्थिति के बारे में।
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भारत में पहली बार 182 करोड़ रुपये की कैप्टागन टैबलेट जब्त

कैप्टागन टैबलेट की जब्ती

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को जानकारी दी कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पहली बार 182 करोड़ रुपये मूल्य की कैप्टागन टैबलेट जब्त की हैं। इसे 'जिहादी ड्रग' के नाम से जाना जाता है। इस मामले में एक विदेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है, और यह कंसाइनमेंट पश्चिम एशिया के लिए भेजा जा रहा था, जिसे ऑपरेशन रेजपिल के तहत पकड़ा गया।


जब्ती का स्थान

यह ड्रग कंसाइनमेंट मुंद्रा पोर्ट और दिल्ली के नेब सराय से जब्त की गई है। इसमें एक सीरियाई नागरिक शामिल है, जिसने इसे चायपत्ती के डिब्बे में छिपाया था। अधिकारियों ने बताया कि यह कंटेनर मुंद्रा पोर्ट पर आया था, जिसे ऊन का कंसाइनमेंट बताया गया था।


अमित शाह का बयान

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार 'नशामुक्त भारत' के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'हमारी एजेंसियों ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत पहली बार जिहादी ड्रग कैप्टागन की 182 करोड़ रुपये की खेप जब्त की है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।'


जिहादी ड्रग का परिचय

कैप्टागन एक शक्तिशाली सिंथेटिक एम्फैटेमिन-टाइप स्टिमुलेंट है। इसे 'जिहादी ड्रग' का नाम इसलिए मिला क्योंकि ISIS और बोको हरम जैसे आतंकवादी संगठनों ने इसका उपयोग लड़ाकों को अधिक ऊर्जा और सहनशक्ति प्रदान करने के लिए किया है। इसे गरीबों का कोकेन भी कहा जाता है।


जांच की प्रक्रिया

भारतीय एजेंसियां ​​सीरियाई नागरिक के संभावित आतंकवादी संबंधों की जांच कर रही हैं, जो दिल्ली से संचालित हो रहा था और ड्रग्स को पश्चिम एशिया भेज रहा था। एक अधिकारी ने कहा, 'यह जब्ती दिल्ली और मुंद्रा पोर्ट से की गई है। लगभग 200 किलो कैप्टागन सीरिया से आया था और इसे सऊदी अरब भेजा जा रहा था। जांच जारी है।'