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भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ते तनाव का असर

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पड़ने लगा है। हालाँकि, मंत्रालय ने कीमतों में वृद्धि की खबरों को खारिज किया है। जानें इस स्थिति का क्या प्रभाव पड़ सकता है और क्या आने वाले समय में कीमतों में बदलाव होगा।
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भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ते तनाव का असर

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि

पेट्रोल-डीजल की कीमतें: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब भारत में भी महसूस किया जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, भारत में अभी तक रिटेल स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार, निकट भविष्य में ग्राहकों को झटका लग सकता है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और शांति समझौता नहीं होता है, तो चुनावों के बाद ईंधन की कीमतों में वृद्धि संभव है। वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं, जिसका मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% और भारत के कच्चे तेल आयात का लगभग 40% हिस्सा है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो सकती है। यह बढ़ोतरी राज्यों के चुनावों के बाद ही देखने को मिल सकती है। जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां अंतिम मतदान 29 अप्रैल को होगा और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। खबरों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। ईरान के वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हमलों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है।

हालांकि, इन सभी चिंताओं के बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि की खबरों को खारिज कर दिया है।

मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी करते हुए कहा है कि ऐसी कोई योजना सरकार के विचाराधीन नहीं है और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं, जो लोगों में डर फैलाने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि पिछले चार वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया गया है, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। वर्तमान स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि पश्चिम एशिया में जल्द कोई समाधान नहीं निकलता है, तो आने वाले दिनों में इसका असर भारत के आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है।