भारत में बाल विवाह और घरेलू हिंसा पर नई रिपोर्ट के चिंताजनक आंकड़े
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2023-24 की रिपोर्ट
हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2023-24 की रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की दर में कमी आई है, जो अब 22.3 प्रतिशत है, जबकि पहले यह 29.2 प्रतिशत थी। बाल विवाह की दर भी घटकर 20.1 प्रतिशत हो गई है, लेकिन ये आंकड़े अभी भी चिंताजनक हैं। महिलाओं में मोटापे की समस्या 7 प्रतिशत बढ़ गई है। प्राइवेट अस्पतालों में सीजेरियन डिलीवरी की दर 54.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाने की दर भी घटकर 55.8 प्रतिशत रह गई है। बच्चों में कुपोषण के कारण लंबाई बढ़ने की दर 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गई है।
गर्भवती महिलाओं को एंटीनेटल केयर (ANC) की उपलब्धता 95.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकारी योजनाओं के चलते माताओं का स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है। हालांकि, बिहार में वैवाहिक हिंसा की दर अभी भी सबसे अधिक 36.1 प्रतिशत है, जबकि केरल को सबसे सुरक्षित राज्य माना गया है.
भारत में बाल विवाह की स्थिति
बाल विवाह की दर में कमी आ रही है, लेकिन चिंता अभी भी बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, 20 से 24 वर्ष की आयु की 20.1 प्रतिशत महिलाएं 18 वर्ष से पहले शादी कर चुकी हैं। यह आंकड़ा NFHS-5 (2019-21) के 23.3 प्रतिशत से केवल तीन प्रतिशत कम है.
चिंताजनक आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, 20-24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह की दर कई राज्यों में अभी भी बहुत अधिक है। बिहार, त्रिपुरा, झारखंड और असम जैसे राज्यों में बाल विवाह की उच्च दर बनी हुई है।
बाल विवाह का लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में दरें अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन हिंदी भाषी और पूर्वी राज्यों में यह समस्या अभी भी चुनौती बनी हुई है।
राज्यवार बाल विवाह के आंकड़े
20 से 24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष से कम उम्र में शादी करने की दर के अनुसार, बिहार सबसे आगे है। राज्यवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
- बिहार: 34.6%
- त्रिपुरा: 34.0%
- झारखंड: 28.1%
- असम: 25.3%
- आंध्र प्रदेश: 25.1%
- राजस्थान: 24.6%
- मध्य प्रदेश: 20.0%
- महाराष्ट्र: 19.7%
- गुजरात: 18.0%
- तेलंगाना: 17.9%
- अरुणाचल प्रदेश: 17.3%
- कर्नाटक: 15.3%
- उत्तर प्रदेश: 13.7%
- मेघालय: 13.8%
- हरियाणा: 11.9%
- छत्तीसगढ़: 10.1%
- पंजाब: 10.2%
- नागालैंड: 10.2%
- तमिलनाडु: 10.5%
- उत्तराखंड: 8.2%
- हिमाचल प्रदेश: 7.9%
- गोवा: 6.8%
- मिजोरम: 6.0%
- केरल: 2.9%
कानूनी पहल
भारत में बाल विवाह को रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। यह कानून लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष से कम उम्र में होने वाली शादी को अवैध मानता है।
बाल विवाह करवाना या उसे बढ़ावा देना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए दोषी को 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
बाल विवाह की सामाजिक जड़ें
भारत की बड़ी जनसंख्या गांवों में निवास करती है, जहां सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंड, लैंगिक असमानता और आर्थिक मजबूरियों के कारण बाल विवाह की प्रथा जारी है। कुछ समुदायों में इसे धार्मिक प्रथा के रूप में देखा जाता है।
