भारत में भूमि असमानता: ग्रामीण क्षेत्रों की चिंताजनक स्थिति
भूमि असमानता का अध्ययन
भारत में भूमि असमानता पर हाल ही में किए गए एक अध्ययन ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। इस अध्ययन के अनुसार, ग्रामीण भारत में शीर्ष 5 प्रतिशत परिवारों के पास 32 प्रतिशत भूमि है, जबकि शीर्ष 1 प्रतिशत परिवारों के पास 18 प्रतिशत कृषि भूमि का स्वामित्व है। यह अध्ययन नितिन कुमार भारती, डेविड ब्लेकस्ली और समरीन मलिक द्वारा किया गया है, जिसमें लगभग 65 करोड़ लोगों और 2.7 लाख गांवों के भूमि आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण स्तर पर भूमि असमानता का औसत गिनी सूचकांक (0 से 100 के पैमाने पर) भूमिहीन परिवारों को शामिल करने पर 71 तक पहुंच जाता है, जबकि 46 प्रतिशत ग्रामीण परिवार पूरी तरह से भूमिहीन हैं।
अध्ययन के अनुसार, किसी गांव में सबसे बड़े जमींदार के पास औसतन 12 प्रतिशत भूमि होती है, जबकि कुछ गांवों में एक ही व्यक्ति के पास आधे से अधिक कृषि भूमि होती है। विभिन्न राज्यों के बीच भूमि असमानता के स्तर में भी बड़ा अंतर पाया गया है, जो वैश्विक स्तर पर देशों के बीच के अंतर के समान है। अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन क्षेत्रों में कृषि के लिए अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां हैं, वहां भूमि का केंद्रीकरण अधिक होता है। ऐतिहासिक कारकों का भूमि वितरण पर गहरा प्रभाव पड़ा है। ब्रिटिश शासन के सीधे नियंत्रण वाले क्षेत्रों में भूमि असमानता अधिक पाई गई है, जबकि रियासतों के अधीन क्षेत्रों में यह कम रही है।
भूमि स्वामित्व पर सामाजिक संरचना का भी प्रभाव स्पष्ट है। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की अधिक जनसंख्या वाले गांवों में भूमिहीनता की दर अधिक है। हालांकि, लंबे समय तक वामपंथी शासन के अधीन रहे केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह प्रवृत्ति कम देखी गई है। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, बाजार और बुनियादी ढांचे तक बेहतर पहुंच भी इस ऐतिहासिक असमानता को समाप्त नहीं कर पाई है।
भूमि असमानता की गंभीरता
ग्रामीण स्तर पर भूमि असमानता के ये तथ्य स्पष्ट करते हैं कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र दो वर्गों में विभाजित हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है, फिर भी किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी हुई है। उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए, भूमिहीन किसानों, विशेषकर पिछड़े वर्ग के लोगों की स्थिति कितनी दयनीय होगी, यह सोचकर ही चिंता होती है। भूमि असमानता को कम करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों को इस रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए भूमि असमानता जैसे गंभीर मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इसे कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
मुख्य संपादक का संदेश
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक
