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भारत में भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण: नागरिकों के लिए नई सुविधाएं

केंद्र सरकार ने भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे नागरिक अब अपने घर से ही भूमि के दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे। यह प्रक्रिया 19 राज्यों में लागू की गई है और इससे बैंकों के लिए लोन प्रक्रिया में तेजी आएगी। डिजिटलीकरण से भूमि विवादों में कमी और पारदर्शिता में वृद्धि की उम्मीद है। जानें इस नई पहल के अन्य लाभ और सुविधाएं।
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भारत में भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण: नागरिकों के लिए नई सुविधाएं

भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना


नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भूमि से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब देश के 19 राज्यों में नागरिक अपने घरों से ही भूमि के दस्तावेज डिजिटल रूप से डाउनलोड कर सकेंगे, जिन्हें कानूनी मान्यता भी प्राप्त होगी। इसके साथ ही, बैंकों के लिए लोन प्रक्रिया में भी तेजी आएगी, क्योंकि वे ऑनलाइन गिरवी रखी जाने वाली भूमि की जांच कर सकेंगे।


डिजिटलीकरण की प्रगति

सरकार के अनुसार, भूमि संसाधन विभाग ने भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जानकारी दी है कि देश के 97.27 प्रतिशत गांवों में भूमि अधिकार से संबंधित रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं। इससे भूमि विवादों में कमी और पारदर्शिता में वृद्धि की उम्मीद है।


नक्शों के साथ भूमि दस्तावेज

मंत्रालय के अनुसार, लगभग 97.14 प्रतिशत भूमि के नक्शों का डिजिटलीकरण भी हो चुका है। 84.89 प्रतिशत गांवों में लिखित आरओआर को डिजिटल नक्शों से जोड़ा गया है। इससे भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे प्रशासन और आम जनता दोनों को सुविधा मिलेगी।


शहरी क्षेत्रों में नई सर्वे योजना

शहरी क्षेत्रों में भूमि व्यवस्था को सुधारने के लिए नक्ष योजना यानी नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज बेस्ड लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशन की शुरुआत की गई है। इसके तहत 157 शहरी स्थानीय निकायों में कार्य चल रहा है। 116 शहरों में हवाई सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और 21 शहरों में सर्वे का कार्य समाप्त हो गया है।


बैंकों के लिए ऑनलाइन जांच की सुविधा

डिजिटलीकरण का सीधा लाभ बैंकिंग क्षेत्र को भी मिला है। अब 406 जिलों में बैंक ऑनलाइन गिरवी रखी जाने वाली भूमि की जांच कर सकेंगे। इससे लोन स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी आएगी और आम लोगों को समय पर ऋण मिल सकेगा। सरकार ने 2025-26 के लिए 24 राज्यों को 1,050 करोड़ रुपये की सहायता भी मंजूर की है।


भूमि का आधार नंबर और रजिस्ट्रेशन प्रणाली

सरकार ने भूमि के लिए यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी यूएलपीआईएन भी लागू किया है। यह 14 अंकों का नंबर होता है और इसे भूमि का आधार कहा जा रहा है। साथ ही, नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम के माध्यम से भूमि की खरीद-बिक्री को सरल बनाया गया है। 17 राज्यों में इसे लागू किया जा चुका है और 88 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार कार्यालय आपस में जुड़े हुए हैं।