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भारत में मानसून और ला नीना का प्रभाव: सर्दियों में ठंड बढ़ने की संभावना

इस वर्ष भारत में मानसून ने अद्भुत बारिश का अनुभव कराया है, जिसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर में चल रहा ला नीना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली सर्दियों में ठंड का अनुभव भी बढ़ा सकता है। अमेरिका की मौसम एजेंसी ने बताया है कि सितंबर से नवंबर के बीच ला नीना बनने की संभावना 50% से अधिक है। इस लेख में जानें कि कैसे यह जलवायु चक्र भारत और अन्य क्षेत्रों में मौसम को प्रभावित कर रहा है और सर्दियों के लिए क्या तैयारी करनी चाहिए।
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भारत में मानसून की स्थिति

इस वर्ष मौसम ने भारत में अद्भुत बदलाव लाए हैं। बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक बने सिस्टम ने मानसून की गति को बनाए रखा है। इसके परिणामस्वरूप, देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश ने अपनी छाप छोड़ी है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर में चल रहा ला नीना है।


दिलचस्प बात यह है कि ला नीना का प्रभाव केवल बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली सर्दियों के मौसम को भी प्रभावित कर सकता है। इस बार ठंड का अनुभव सामान्य से अधिक होने की संभावना है।


अमेरिकी मौसम एजेंसी ने बताया है कि सितंबर से नवंबर के बीच ला नीना बनने की संभावना 50% से अधिक है, और वर्ष के अंत तक यह संभावना और बढ़ सकती है। एक बार जब यह पैटर्न शुरू होता है, तो इसका प्रभाव सर्दियों और शुरुआती वसंत तक रह सकता है।


ला नीना एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ठंडा हो जाता है। यह बदलाव मौसमीय धाराओं और हवाओं को प्रभावित करता है, जिससे वैश्विक मौसम पर असर पड़ता है। इसके विपरीत, अल नीनो तब होता है जब समुद्र का पानी गर्म हो जाता है।


भारत में, ला नीना बारिश को बढ़ावा देती है और मानसून को मजबूत बनाती है। यही कारण है कि इस वर्ष भारत के अधिकांश क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा हुई है। हालांकि, इसके बाद ठंड का असर महसूस किया जा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत और एशिया के बड़े हिस्से में तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है।


दूसरी ओर, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में ला नीना सूखा ला सकती है, जबकि अटलांटिक महासागर में यह तूफानों का कारण बनती है।


पिछले कुछ वर्षों में, दुनिया ने ला नीना और अल नीनो के प्रभाव को देखा है। 2020 से 2022 तक, लगातार तीन वर्षों तक ला नीना का प्रभाव रहा, जिसे वैज्ञानिकों ने "ट्रिपल डीप ला नीना" कहा। इसके बाद 2023 में अल नीनो ने दस्तक दी, जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि हुई।


विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ये चक्र पहले से अधिक बार और अधिक तीव्रता से उभर सकते हैं, जिससे मौसम की अनिश्चितता बढ़ेगी।


भारत के लिए, यह संकेत स्पष्ट हैं। इस बार मानसून ने खेतों को लाभ पहुंचाया है, लेकिन सर्दियों की शुरुआत कठोर हो सकती है। किसानों और आम लोगों को अगले मौसम के लिए अतिरिक्त तैयारी करनी होगी।