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भारत में रसोई गैस की बिक्री में कमी, संकट का असर

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण भारत में रसोई गैस की बिक्री में 16% की कमी आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एलपीजी की खपत में गिरावट आई है, जिससे घरेलू उपयोग के लिए गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए कॉमर्शियल सप्लाई में कटौती की है और कीमतों में वृद्धि की है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में।
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भारत में रसोई गैस की बिक्री में कमी, संकट का असर

भारत में रसोई गैस की बिक्री में गिरावट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण भारत में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका प्रभाव रसोई गैस की बिक्री और खपत पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में रसोई गैस की बिक्री में 16 प्रतिशत की कमी आई है। इसका मतलब है कि गैस की आपूर्ति में कम से कम इतनी कमी आई है। हालांकि, सरकार का कहना है कि तेल और गैस की आपूर्ति में कोई समस्या नहीं है।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में एलपीजी की खपत में 16.16 प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले वर्ष, यानी 2025 के अप्रैल में एलपीजी की खपत 2.62 मिलियन टन थी, जो इस वर्ष अप्रैल में घटकर 2.2 मिलियन टन रह गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के मुकाबले भी अप्रैल में खपत में कमी आई है। मार्च में खपत 2.379 मिलियन टन थी।


आपूर्ति में कमी के कारण, सरकार को होटलों और उद्योगों के लिए दी जाने वाली कॉमर्शियल सप्लाई में कटौती करनी पड़ी है ताकि घरेलू रसोई गैस की कमी न हो। इसके साथ ही, सरकार ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भी भारी वृद्धि की है। ध्यान रहे कि भारत अपनी आवश्यकताओं का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज की खाड़ी के रास्ते आता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिकी हमलों के कारण यह समुद्री मार्ग लगभग बंद हो गया है। आपूर्ति में कमी के चलते, सरकार ने रसोई गैस की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। अब शहरों में 21 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के बाद ही बुकिंग की जा सकती है। इसके अलावा, कीमतों में वृद्धि के बाद दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत तीन हजार रुपए से अधिक हो गई है।