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भारत में हार्ट बीमारियों की बढ़ती संख्या: एक गंभीर चिंता

हाल के वर्षों में भारत में हार्ट बीमारियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसमें युवा भी शामिल हैं। NSO की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले सात वर्षों में हार्ट बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इलाज की लागत भी काफी अधिक है, जो सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। जानें इस गंभीर स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
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भारत में हार्ट बीमारियों की बढ़ती संख्या: एक गंभीर चिंता

हार्ट बीमारियों में वृद्धि

हाल के वर्षों में, हार्ट से जुड़ी बीमारियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसमें युवा भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें युवा अचानक हार्ट अटैक का शिकार हो गए। अब, नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑर्गनाइजेशन (NSO) की एक नई रिपोर्ट इस स्थिति की गंभीरता को उजागर कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हार्ट बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या पिछले सात वर्षों में तीन गुना बढ़ गई है। इसके इलाज की लागत भी काफी अधिक है, सरकारी अस्पतालों में हार्ट बीमारियों के इलाज के लिए न्यूनतम 10,000 रुपये खर्च होते हैं, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में यह राशि लाखों में पहुंच जाती है।


NSO की रिपोर्ट के प्रमुख तथ्य

NSO द्वारा जारी की गई 'हाउसहोल्ड सोशल कंजम्प्शन: हेल्थ' रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच किए गए सर्वे में प्रति एक लाख जनसंख्या में 3891 लोग हार्ट से संबंधित, 3681 लोग डायबिटीज और 1536 लोग सांस की बीमारियों से ग्रसित पाए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि 15 से 29 वर्ष के युवा भी हार्ट समस्याओं का सामना कर रहे हैं। 2025 में इस आयु वर्ग के 3.4 प्रतिशत लोग हार्ट बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती हुए।


ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थिति

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हार्ट से संबंधित समस्याओं का अधिक प्रभाव पुरुषों पर पड़ा है, चाहे वे ग्रामीण हों या शहरी। वर्तमान में, दिल की बीमारियों का देश में कुल बीमारियों में हिस्सा लगभग 25.6 प्रतिशत है। 2017-18 में प्रति एक लाख लोगों में से 1333 लोग हार्ट बीमारियों से प्रभावित थे, जो 2025 में बढ़कर 3891 हो गए हैं।


हार्ट बीमारियों की गंभीरता

अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 10.3 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 11.9 प्रतिशत मरीज हार्ट समस्याओं के कारण भर्ती होते हैं। यह आंकड़ा प्रति 1000 व्यक्तियों के हिसाब से है। ग्रामीण क्षेत्रों में 11.5 प्रतिशत पुरुष और 9 प्रतिशत महिलाएं हार्ट समस्याओं का शिकार होती हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा क्रमशः 13.2 प्रतिशत और 10.5 प्रतिशत है।


उम्र के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने वाले

60 वर्ष से अधिक आयु के लोग हार्ट समस्याओं के कारण सबसे अधिक अस्पताल में भर्ती होते हैं। 2025 में, इस आयु वर्ग के 18.2 प्रतिशत लोग इसी समस्या के चलते अस्पताल पहुंचे।


हार्ट बीमारियों का इलाज और खर्च

हार्ट से जुड़ी समस्याएं कार्डियोवस्कुलर श्रेणी में आती हैं, जिसमें हाइपरटेंशन, हृदय रोग, छाती में दर्द और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। NSO की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण सरकारी अस्पतालों में हार्ट मरीजों के इलाज पर औसतन 10,207 रुपये खर्च होते हैं। एनजीओ या ट्रस्ट के अस्पतालों में यह खर्च 87,063 रुपये और प्राइवेट अस्पतालों में 66,387 रुपये तक पहुंच जाता है।


शहरी अस्पतालों में खर्च

शहरी अस्पतालों में, सरकारी अस्पतालों में औसतन 10,666 रुपये, एनजीओ या ट्रस्ट के अस्पतालों में 49,286 रुपये और प्राइवेट अस्पतालों में 1,01,099 रुपये खर्च होते हैं। यह दर्शाता है कि हार्ट समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च 10,000 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक हो सकता है।


अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की उम्र

15 से 29 साल- 3.4%
30 से 44 साल- 7.3%
45 से 59 साल- 13.9%
60 से ज्यादा- 18.2%