भारत में हिंसक अपराधों की स्थिति: 2024 के आंकड़े
भारत में दंगों की alarming स्थिति
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने 2024 के लिए भारत में अपराध से संबंधित नवीनतम आंकड़े जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में हिंसक अपराधों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूरे देश में दंगों के 30,348 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 29,797 मामले विभिन्न राज्यों में और 551 मामले केंद्र शासित प्रदेशों में आए हैं। दंगों और भीड़ हिंसा के मामलों में महाराष्ट्र सबसे आगे है।
आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि दंगा करने और सार्वजनिक शांति को भंग करने के मामलों में महाराष्ट्र और बिहार सबसे संवेदनशील राज्यों के रूप में उभरे हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इसमें ऐसे मामले शामिल हैं जिनमें चोट नहीं आई है, लेकिन कानूनी धाराओं (BNS 190/IPC 147-151) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जबकि बड़े राज्यों में हिंसक झड़पों की संख्या हजारों में है, वहीं कुछ राज्यों ने शांति की मिसाल पेश की है, जहां पूरे वर्ष दंगों का एक भी मामला नहीं आया।
दंगों के मामले में शीर्ष 5 राज्य
राज्यों में दंगों के मामलों की संख्या केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में अधिक है। केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक 452 दंगा मामले दर्ज किए गए हैं।
| क्रम संख्या | राज्य |
दंगा मामलों की संख्या
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| 1 | महाराष्ट्र | 8,235 |
| 2 | कर्नाटक | 3,714 |
| 3 | बिहार | 3,185 |
| 4 | उत्तर प्रदेश | 2,610 |
| 5 | हरियाणा | 1,641 |
दंगा के मामलों में शांति के उदाहरण
रिपोर्ट का एक सकारात्मक पहलू यह है कि उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में दंगा का एक भी मामला नहीं दर्ज हुआ। पंजाब, मेघालय और मिजोरम में दंगों का कोई मामला नहीं आया। इसके अलावा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों में दंगा मामलों की संख्या भी बहुत कम रही।
दंगा मामलों की सबसे कम संख्या वाले 5 राज्य
| क्रम संख्या | राज्य |
दंगा मामलों की संख्या
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| 1 | नागालैंड | 1 |
| 2 | अरुणाचल प्रदेश | 12 |
| 3 | सिक्किम | 13 |
| 4 | त्रिपुरा | 23 |
| 5 | गोवा | 36 |
आंकड़ों का महत्व
NCRB ने स्पष्ट किया है कि राज्यों की तुलना केवल अपराध की संख्या के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। रिपोर्ट में बताया गया है कि जनसंख्या, पुलिसिंग, FIR दर्ज करने की दर और स्थानीय परिस्थितियां भी अपराध के आंकड़ों को प्रभावित करती हैं।
