भारत-यूएई के बीच ऐतिहासिक समझौता, पाकिस्तान ने सऊदी अरब से बढ़ाए रिश्ते
नई भू-राजनीतिक समीकरण
नई दिल्ली: दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां भारत और पाकिस्तान अपने-अपने खेमों के साथ नए रिश्तों की दिशा में बढ़ रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो प्रमुख घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जो भविष्य के नए गठबंधनों की ओर इशारा करती हैं। एक ओर, पाकिस्तान अपने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के माध्यम से सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते को विस्तार देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर, भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच संबंधों में अभूतपूर्व गर्माहट आई है। सोमवार को भारत और यूएई के बीच तीन अरब डॉलर की एलएनजी (LNG) डील पर हस्ताक्षर हुए, जिससे दोनों देशों ने अपने रक्षा और व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प लिया।
भारत बना यूएई का प्रमुख ग्राहक
भारत और यूएई के मजबूत होते रिश्तों का ताजा उदाहरण यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान का हालिया भारत दौरा है। अल-नाहयान ने केवल दो घंटे के लिए भारत का दौरा किया, लेकिन इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की। इस वार्ता में भारत ने यूएई से 3 अरब डॉलर का एलएनजी खरीद समझौता किया। इस समझौते के तहत, एडीएनओसी (ADNOC) अगले 10 वर्षों तक भारत की हिंदुस्तान पेट्रोलियम को हर साल 5 लाख मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति करेगी। दोनों नेताओं ने अगले छह वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर से बढ़ाकर 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य भी रखा।
पाकिस्तान की सऊदी अरब और तुर्की के साथ रक्षा किलेबंदी
जहां भारत आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, वहीं पाकिस्तान रक्षा समझौतों में उलझा हुआ है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते के विस्तार पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते में किसी तीसरे पक्ष, जैसे तुर्की, को शामिल करने का निर्णय पाकिस्तान और सऊदी अरब मिलकर करेंगे। पिछले हफ्ते एक पाकिस्तानी मंत्री ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौते का ड्राफ्ट तैयार होने की घोषणा की थी।
सऊदी-यूएई प्रतिद्वंद्विता और नए वैश्विक गुट
इन समझौतों के पीछे मध्य-पूर्व में सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ती क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। दोनों देश यमन युद्ध और तेल उत्पादन जैसे मुद्दों पर हाल के वर्षों में आमने-सामने आए हैं। इस तनाव का परिणाम यह हुआ है कि यूएई ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा जारी करना बंद कर दिया है, जबकि सऊदी अरब पाकिस्तान के करीब जा रहा है। इस नए समीकरण पर रक्षा विशेषज्ञ मैक्स अब्राहम्स का कहना है कि पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी अरब के गठबंधन को चुनौती देने के लिए भारत-इजरायल-यूएई का गठबंधन मजबूत होता दिख रहा है।
भारत का स्पष्ट रुख: क्षेत्रीय संघर्षों से दूर रहना
हालांकि दुनिया नए गुटों की चर्चा कर रही है, भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट रखी है। यूएई के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर करने के बाद, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत किसी क्षेत्रीय संघर्ष का हिस्सा बनेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी क्षेत्रीय देश के साथ रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर सहयोग का अर्थ यह नहीं है कि भारत उस क्षेत्र के आपसी झगड़ों में शामिल होगा। भारत का ध्यान पूरी तरह से अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों पर केंद्रित है।
