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भारत-यूएई के बीच ऐतिहासिक समझौते: रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष में नई साझेदारी

भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हाल ही में हुए दौरे में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच हुई मुलाकात में रक्षा, ऊर्जा, और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया। जानें इस दौरे की खास बातें और भविष्य की योजनाएं।
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भारत-यूएई के बीच ऐतिहासिक समझौते: रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष में नई साझेदारी

नई दिल्ली में भारत और यूएई के बीच दोस्ती का नया अध्याय


नई दिल्ली: भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक नई दोस्ती का अध्याय शुरू हुआ है। सोमवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के दिल्ली दौरे के दौरान, दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और सिविल न्यूक्लियर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान, पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर सीधे राष्ट्रपति से मुलाकात की, जहां उन्होंने शेख मोहम्मद को गले लगाया और कार में हंसते हुए नजर आए।


इस दौरे का मुख्य आकर्षण गुजरात का धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन रहा। यूएई के निवेश मंत्रालय और गुजरात सरकार के बीच हुए समझौते के तहत, धोलेरा में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, ग्रीनफील्ड पोर्ट और स्मार्ट अर्बन टाउनशिप का विकास किया जाएगा। यह निवेश धोलेरा को वैश्विक व्यापार और एविएशन ट्रेनिंग का एक प्रमुख केंद्र बना देगा। यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।


ऊर्जा और न्यूक्लियर क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए HPCL और ADNOC गैस के बीच 10 साल का समझौता हुआ है। 2028 से, यूएई हर साल 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति करेगा। इसके अतिरिक्त, भारत के SHANTI एक्ट 2025 के तहत, दोनों देशों ने सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर भी सहमति जताई है, जिसमें छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) जैसी उन्नत तकनीक शामिल है।


अंतरिक्ष और सुपरकंप्यूटिंग में सहयोग

अंतरिक्ष के क्षेत्र में, IN-SPACe और यूएई स्पेस एजेंसी मिलकर एक एकीकृत स्पेस इकोसिस्टम का निर्माण करेंगे। इसका उद्देश्य न केवल संयुक्त मिशनों की शुरुआत करना है, बल्कि उच्च कौशल वाले रोजगार और स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, C-DAC और यूएई की कंपनी G-42 मिलकर भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करेंगे।


2032 तक 200 बिलियन डॉलर का व्यापार लक्ष्य

आर्थिक मोर्चे पर, दोनों नेताओं ने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 बिलियन डॉलर से अधिक करने पर सहमति बनी है। इसमें MSMEs को शामिल करने और 'भारत मार्ट' जैसी पहलों का सहारा लिया जाएगा।


भारतीय संस्कृति का परिचय

डिप्लोमेसी के दौरान, पीएम मोदी ने अल नाहयान को भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाई। उन्होंने राष्ट्रपति को गुजरात का पारंपरिक नक्काशीदार लकड़ी का झूला और चांदी के डिब्बे में पश्मीना शॉल भेंट की। इसके अलावा, शाही परिवार को कश्मीरी केसर भी उपहार में दिया गया।