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भारत सरकार का ईरान से नागरिकों को एयरलिफ्ट करने का निर्णय

भारत सरकार ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के कारण अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने का निर्णय लिया है। लगभग 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में हैं, और पहले बैच को एयरलिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और सरकार की तैयारियों के बारे में।
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भारत सरकार का ईरान से नागरिकों को एयरलिफ्ट करने का निर्णय

भारत का ईरान से नागरिकों को निकालने का निर्णय

नई दिल्ली। भारत सरकार ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के मद्देनजर अपने नागरिकों को वापस लाने का निर्णय लिया है। पिछले 20 दिनों से जारी इस स्थिति के बीच, भारतीय नागरिकों को एयरलिफ्ट किया जाएगा। पहले विमान की उड़ान शुक्रवार को तेहरान के लिए निर्धारित की गई है। वर्तमान में ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। उनके निकासी के निर्णय से पहले, सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें नागरिकों को विभिन्न सलाहें दी गई थीं।


सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने ईरान में पढ़ाई कर रहे छात्रों और तीर्थयात्रा पर गए लोगों को निकालने की पूरी तैयारी कर ली है। जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने बताया कि सभी छात्रों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। भारतीय दूतावास ने उनकी व्यक्तिगत जानकारी और पासपोर्ट एकत्र कर लिए हैं। पहले बैच को सुबह आठ बजे तक तैयार रहने के लिए सूचित किया गया है। इस बैच में गोलेस्तान यूनिवर्सिटी, शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के कुछ छात्र शामिल हैं।


भारत सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को अपने पासपोर्ट, वीजा और अन्य आवश्यक दस्तावेज हमेशा तैयार रखने चाहिए। इसके अलावा, किसी भी सहायता के लिए वे भारतीय दूतावास से संपर्क कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ईरान की स्थिति पर चर्चा की गई।


ईरान में पिछले 20 दिनों की हिंसा में 2,500 से अधिक लोगों की मौत की खबरें आई हैं। वहीं, अमेरिका ने ईरान में हो रही कार्रवाई पर दखल देने का ऐलान किया है और कहा जा रहा है कि अमेरिकी बेड़ा मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इस स्थिति के कारण ईरान में हालात और बिगड़ने की आशंका है, जिसके चलते भारत ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने का निर्णय लिया।