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भारत सरकार ने आधार ऐप को स्मार्टफोनों में अनिवार्य करने का प्रस्ताव वापस लिया

भारत सरकार ने आधार ऐप को स्मार्टफोनों में अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के प्रस्ताव को वापस ले लिया है। यह निर्णय प्रमुख कंपनियों की आपत्तियों के बाद लिया गया, जिन्होंने सुरक्षा और लागत के मुद्दों को उठाया। UIDAI ने कहा कि आईटी मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की समीक्षा की और इसे आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं था। यह कदम उद्योग के विरोध के चलते सरकार द्वारा उठाए गए कई प्रयासों में से एक है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और उद्योग की प्रतिक्रिया के बारे में।
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भारत सरकार ने आधार ऐप को स्मार्टफोनों में अनिवार्य करने का प्रस्ताव वापस लिया

सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय


भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उस प्रस्ताव को वापस ले लिया है, जिसमें सभी स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए अपने उपकरणों में आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया जाना था। यह प्रस्ताव भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, एप्पल और सैमसंग जैसी प्रमुख कंपनियों ने सुरक्षा, लागत और उत्पादन जटिलताओं के कारण इस पर गंभीर आपत्तियां उठाईं। UIDAI ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आईटी मंत्रालय इस अनिवार्यता के पक्ष में नहीं है।


विरोध के कारण

जनवरी में UIDAI ने आईटी मंत्रालय से अनुरोध किया था कि वह एप्पल, गूगल और अन्य बड़ी कंपनियों से बातचीत करे, ताकि स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने की योजना को आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन जैसे ही यह कदम उद्योग के सामने रखा गया, विरोध शुरू हो गया। विशेष रूप से एप्पल और सैमसंग ने डिवाइस सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उनका तर्क था कि इससे उनके ऑपरेटिंग सिस्टम की अखंडता पर खतरा होगा। इसके अलावा, कंपनियों ने यह भी कहा कि इस अनिवार्यता से उत्पादन लागत में वृद्धि होगी, क्योंकि उन्हें भारतीय और निर्यात बाजार के लिए अलग-अलग मैन्युफैक्चरिंग लाइनें चलानी पड़ेंगी।


UIDAI का आधिकारिक बयान

UIDAI ने शुक्रवार (18 अप्रैल) को एक आधिकारिक बयान में कहा कि आईटी मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की गहन समीक्षा की और 'इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ परामर्श' के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि वह स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस निर्णय के पीछे क्या कारण थे। यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले दो वर्षों में यह छठी बार है जब सरकार ने फोन में सरकारी ऐप्स को प्री-लोड करने का प्रयास किया है, और हर बार उद्योग के विरोध के कारण उसे पीछे हटना पड़ा।


पिछले अनुभव

यह पहली बार नहीं है जब सरकार को ऐसे प्रस्ताव से पलटना पड़ा है। पिछले साल दिसंबर में, सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों के लिए एक टेलीकॉम सुरक्षा ऐप 'संचार साथी' को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने का आदेश दिया था। उस समय भी कंपनियों ने विरोध किया था, जिसके बाद सरकार को कुछ ही दिनों में अपना आदेश वापस लेना पड़ा। नई दिल्ली स्थित डिजिटल अधिकार समूह 'इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन' के संस्थापक अपर गुप्ता ने सरकार के इस नवीनतम निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ऐसे अन्य प्रस्तावों को भी वापस लिया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास न तो कोई विधायी आधार है और न ही कोई स्पष्ट सार्वजनिक नीति का उद्देश्य।