Newzfatafatlogo

भारतीय न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल: जस्टिस पंचोली की नियुक्ति का मामला

भारतीय न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, खासकर जस्टिस विपुल एम. पंचोली की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के संदर्भ में। जस्टिस बीवी नागरत्नम्मा ने इस नियुक्ति पर गंभीर असहमति जताई है, जिससे न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। क्या जनता को इस प्रक्रिया के बारे में जानने का अधिकार नहीं है? जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 | 
भारतीय न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल: जस्टिस पंचोली की नियुक्ति का मामला

न्यायपालिका की भूमिका और पारदर्शिता

लोकतंत्र में न्यायपालिका एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिससे नागरिक संविधान, कानून और व्यवस्था की सुरक्षा की उम्मीद करते हैं। हालांकि, वर्तमान में ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय न्यायपालिका आम जनता की पारदर्शिता की अपेक्षाओं को नजरअंदाज कर रही है।


सीज़र की पत्नी को हर प्रकार के संदेह से मुक्त रहना चाहिए। इसका मतलब है कि राजा और उनके परिवार को ऐसी किसी धारणा का निर्माण नहीं होने देना चाहिए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा पर सवाल उठे। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह कहावत अक्सर न्यायपालिका के संदर्भ में दोहराई जाती है। इसलिए, यह आवश्यक है कि न्यायपालिका अपनी पारदर्शिता को बनाए रखे। जस्टिस विपुल एम. पंचोली की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के मामले में भी यही स्थिति है। कॉलेजियम की सदस्य जस्टिस बीवी नागरत्नम्मा ने इस नियुक्ति पर गंभीर असहमति जताई है।


उन्होंने बताया कि पहले भी जस्टिस पंचोली की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति का प्रस्ताव आपत्तियों के कारण रोका गया था। उस समय जस्टिस विक्रम नाथ ने एतराज किया था। लेकिन कुछ महीनों बाद उनका पदोन्नति का प्रस्ताव फिर से लाया गया। यह भी ध्यान देने योग्य है कि जिस दिन कॉलेजियम ने 4-1 के बहुमत से उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी, उसके अगले दिन केंद्र ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी। जस्टिस नागरत्नम्मा ने अपने एतराज के पीछे "गंभीर और गहन" कारणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस पंचोली का गुजरात हाई कोर्ट से पटना हाई कोर्ट में स्थानांतरण सामान्य प्रक्रिया नहीं थी।


यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र ने कॉलेजियम के निर्णय को लागू करने में नौ महीने तक देरी की थी। इस पृष्ठभूमि ने कॉलेजियम और केंद्र के हालिया निर्णय को विवादास्पद बना दिया है। कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं। 2023 में जस्टिस पंचोली का गुजरात हाई कोर्ट से स्थानांतरण क्यों हुआ? इस बार कॉलेजियम में जस्टिस नागरत्नम्मा ने उनके बारे में क्या जानकारी प्रस्तुत की? क्या जनता को इस बारे में जानने का अधिकार नहीं है? आखिरकार, जस्टिस पंचोली को 2031 में भारत के प्रधान न्यायाधीश बनने की उम्मीद है। इसलिए, यह उचित है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की संबंधित कार्यवाही को सार्वजनिक करे, ताकि तथ्यों की स्पष्टता से संदेह का समाधान हो सके।