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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: पश्चिम एशिया में तनाव का प्रभाव

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर की घोषणा की, जिससे बाजार में बेचैनी बढ़ गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट आई, और कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा है और निवेशकों की प्रतिक्रिया कैसी रही है।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: पश्चिम एशिया में तनाव का प्रभाव

सोमवार को बाजार में गिरावट


सोमवार को बाजार खुलते ही गिरावट का दौर शुरू


मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। हाल ही में अमेरिका ने ईरान में अपने पसंदीदा राष्ट्रपति की नियुक्ति की इच्छा जताई थी, जबकि ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई की घोषणा की। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में स्थिति को और भी गंभीर बना दिया।


जैसे ही बाजार खुला, सेंसेक्स में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ। सुबह 10:20 बजे तक सेंसेक्स 2092 अंक गिरकर 76,825 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 650 अंक की गिरावट के साथ 23,800 पर कारोबार कर रहा था। इस दौरान कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।


सेंसेक्स में शुरुआती गिरावट

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी आई, जिससे बाजार दबाव में रहा। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स 2300 अंक तक गिर गया। बाजार खुलने पर सेंसेक्स 1857.34 अंक या 2.35% गिरकर 77,061.56 पर आ गया, जबकि निफ्टी 519.50 अंक या 2.12% गिरकर 23,930.95 अंक पर पहुंच गया। इस दौरान रुपये की कीमत भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 92.25 पर आ गई।


तेल की कीमतों में वृद्धि

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। बाजार में यह आशंका जताई जा रही है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जो कि विश्व के प्रमुख तेल ट्रांजिट मार्गों में से एक है। कच्चे तेल की कीमतें जुलाई 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं और लगभग तीन साल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।