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भारतीय सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई, मणिपुर में सुरक्षा बढ़ाई

भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में आतंकवादियों के ठिकाने का भंडाफोड़ किया और राजौरी में घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया। मणिपुर में भी सुरक्षा को मजबूत किया गया है। जानें इस अभियान की पूरी जानकारी और सेना की उपलब्धियों के बारे में।
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भारतीय सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई, मणिपुर में सुरक्षा बढ़ाई

नई दिल्ली: दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम किया


नई दिल्ली: भारतीय सेना के जवानों ने सीमा पर एक बार फिर दुश्मनों के नापाक इरादों को विफल कर दिया है। शनिवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के एक दूरदराज के गांव में सेना ने आतंकवादियों के छिपने के स्थान का पता लगाया। इसके साथ ही, राजौरी में नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की कोशिश को भी नाकाम किया गया। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में भी सेना ने म्यांमार सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत किया है।


पुंछ में आतंकियों का ठिकाना ढूंढा गया

सेना की 'व्हाइट नाइट कॉर्प्स' ने पुंछ के 'हरि बुड्ढा बाउल' क्षेत्र में एक सटीक सूचना के आधार पर तलाशी अभियान चलाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, आतंकवादियों ने एक प्राकृतिक गुफा में अपना ठिकाना बना रखा था। गहन तलाशी के दौरान, जवानों ने वहां से एक पिस्तौल, कुछ मैगजीन और बड़ी मात्रा में रसद सामग्री बरामद की। सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इस अभियान ने क्षेत्र में सुरक्षा बलों की बढ़ती उपस्थिति को और मजबूत किया है।


राजौरी: घुसपैठ की कोशिश नाकाम

पुंछ की कार्रवाई के साथ ही राजौरी जिले में भी भारतीय सेना को महत्वपूर्ण सफलता मिली। नियंत्रण रेखा के सुंदरबनी सेक्टर में 'नथुआ टिब्बा' क्षेत्र में गुरुवार तड़के आतंकवादियों की संदिग्ध गतिविधि देखी गई थी। सतर्क जवानों ने घुसपैठ की इस कोशिश को विफल करते हुए मौके से भारी मात्रा में हथियारों की खेप बरामद की। सेना ने यहां से एक एके राइफल, दो मैगजीन, बैकपैक और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया है।


मणिपुर: म्यांमार सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई

पूर्वोत्तर में भारतीय सेना की 'स्पीयर कॉर्प्स' की 'रेड शील्ड डिवीजन' ने एक साहसिक अभियान को अंजाम दिया। घने जंगलों के बीच भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 2.6 किलोमीटर लंबे गलियारे को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया गया है। इस डिमाइनिंग ऑपरेशन के दौरान सेना ने नौ आईईडी (IED) और दो ऑर्डनेंस सामग्री को नष्ट किया। सरकारी एजेंसियों के अनुरोध पर यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि सीमा पर बाड़ लगाने का कार्य फिर से शुरू किया जा सके। खुफिया जानकारी मिली थी कि पूर्व उग्रवादी शिविरों की मौजूदगी के कारण यहां विस्फोटक बिछाए गए थे।