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भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कोडिंग छोड़कर रूस में सफाई का काम किया

एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मुकेश मंडल, ने रूस में सफाईकर्मी के रूप में काम करना शुरू किया है, जहां उसे हर महीने लगभग 1 लाख रुपये की सैलरी मिल रही है। यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। मुकेश का कहना है कि उन्होंने यह काम अस्थायी रूप से पैसे बचाने के लिए चुना है। जानें इस अनोखे सफर के बारे में और कैसे यह स्थिति भारत में बेरोजगारी और ब्रेन ड्रेन से जुड़ी है।
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भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कोडिंग छोड़कर रूस में सफाई का काम किया

सॉफ्टवेयर इंजीनियर का अनोखा सफर

नई दिल्ली: भारत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को आमतौर पर एक प्रतिष्ठित और उच्च आय वाला पेशा माना जाता है। लेकिन हाल ही में रूस से आई एक खबर ने सबको चौंका दिया है। एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने कोडिंग छोड़कर सड़कों पर झाड़ू लगाने का काम शुरू किया है। इस काम के लिए उसे हर महीने लगभग 1 लाख रुपये की सैलरी मिल रही है, जो भारत में कई इंजीनियरों की शुरुआती सैलरी से भी अधिक है।


कौन है यह इंजीनियर?


रिपोर्ट के अनुसार, 26 वर्षीय मुकेश मंडल वर्तमान में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत हैं। मुकेश का पेशा एक सॉफ्टवेयर डेवलपर का है और उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ काम किया है। अब उनके हाथ कंप्यूटर की कीबोर्ड से हटकर रूस की ठंडी सड़कों की सफाई कर रहे हैं।


अन्य पेशेवर भी शामिल हैं


रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मुकेश अकेला नहीं है, बल्कि लगभग 17 भारतीयों का एक समूह वहां सफाई का काम कर रहा है। ये सभी लोग चार महीने पहले रूस पहुंचे थे और इनमें से कुछ वेडिंग प्लानर, ड्राइवर और आर्किटेक्ट जैसे विभिन्न पेशों से जुड़े हैं।


रूस में मजदूरों की कमी


रूस में वर्तमान में श्रमिकों की भारी कमी है, जिसके कारण रूसी कंपनियां विदेशों से कामगारों को बुला रही हैं। सेंट पीटर्सबर्ग की जिस कंपनी ने इन भारतीयों को नौकरी दी है, वह उन्हें सैलरी के साथ-साथ रहने, खाने और सुरक्षा की सुविधाएं भी प्रदान कर रही है। इन लोगों को प्रति माह लगभग 1 लाख से 1.1 लाख रुपये मिल रहे हैं, जो वैश्विक नौकरी बाजार की अनिश्चितता के बीच एक आकर्षक राशि है।


काम का महत्व


मुकेश मंडल का कहना है कि उन्होंने यह काम मजबूरी में नहीं, बल्कि एक रणनीति के तहत अस्थायी रूप से चुना है। उनका उद्देश्य यहां कुछ समय काम करके पैसे बचाना है, जिसके बाद वे भारत लौट जाएंगे। उनका मानना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, असली महत्व मेहनत और ईमानदारी का है।


सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से फैल रही है। कुछ लोग इसे युवाओं की मेहनत और जज्बे के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे भारत में बेरोजगारी और ब्रेन ड्रेन से जोड़कर चिंता जता रहे हैं।