भारतीय हथियारों की वैश्विक मांग में वृद्धि: ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव
भारतीय हथियारों की बढ़ती मांग
ब्रह्मोस, आकाश और नेत्र की बढ़ती मांग
भारतीय रक्षा उपकरणों की मांग में तेजी आई है, खासकर ब्रह्मोस, आकाश, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र जैसे हथियारों के उपयोग के बाद। कई देशों ने इन हथियारों को खरीदने में रुचि दिखाई है, और कुछ के साथ सौदों की राशि हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इनकी कुल कीमत 21,000 करोड़ रुपए से अधिक है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत का रक्षा निर्यात 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62% अधिक है। 2016-17 में यह आंकड़ा केवल 1,522 करोड़ रुपए था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पिछले एक दशक में निर्यात में 25 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।
रक्षा सौदों की जानकारी
फिलीपींस, वियतनाम और अन्य दो देशों के साथ ब्रह्मोस के लिए लगभग 12,500 करोड़ रुपए के सौदे हो चुके हैं। इंडोनेशिया के साथ 3,600 करोड़ रुपए की डील अंतिम मंजूरी के चरण में है। आकाश मिसाइल सिस्टम के लिए अर्मेनिया से 6,100 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट पहले ही किया जा चुका है।
वैश्विक निर्यात का विस्तार
भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिनमें अमेरिका, फ्रांस और अर्मेनिया शामिल हैं। अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार है, जहां 2.8 अरब डॉलर के उपकरण बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों को बेचे जाते हैं। अर्मेनिया जैसे देश पूरी तरह से तैयार हथियारों की खरीद कर रहे हैं।
