भुवनेश्वर में पाकिस्तानी एजेंट को जानकारी देने वाले सात दोषियों को तीन साल की सजा
भुवनेश्वर की अदालत का ऐतिहासिक फैसला
भुवनेश्वर: भुवनेश्वर की उप-विभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (SDJM) अदालत ने देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। ओटीपी (OTP) आधारित धोखाधड़ी के माध्यम से संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंट को भारत की संवेदनशील जानकारी साझा करने के मामले में अदालत ने बुधवार को सात व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। इस मामले में पुख्ता सबूतों की गहन जांच के बाद सभी दोषियों को तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
साक्ष्यों के आधार पर सजा और जुर्माना
एसडीजेएम अदालत ने इस गंभीर मामले में 56 दस्तावेजी साक्ष्यों और 11 गवाहों की गवाही को आधार बनाकर अपना कड़ा फैसला सुनाया। इन ठोस सबूतों ने अदालत में आरोपियों की अवैध और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता को पूरी तरह साबित कर दिया। प्रेस नोट के अनुसार, सभी सात दोषियों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास के साथ-साथ प्रत्येक पर 32,000 रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि जुर्माना राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो दोषियों को तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना पड़ेगा।
भारतीय सिम कार्ड का दुरुपयोग
यह मामला डिजिटल संचार और भारतीय सिम कार्ड के गंभीर दुरुपयोग से संबंधित है। जांच में पता चला कि इन दोषियों ने कई सिम कार्ड इकट्ठा किए और उनके ओटीपी विदेशी संचालकों के साथ साझा कर दिए। इसके परिणामस्वरूप विदेशी एजेंटों ने अवैध गतिविधियों के लिए संचार स्थापित किया और भारतीय नेटवर्क तक अपनी अवैध पहुंच बनाई। दोषियों की पहचान पठानी समंत लेंका, अभिजीत संजय जांबुरे, मोहम्मद इकबाल हुसैन, प्रीतम कर, सौम्य रंजन पटनायक, प्रद्युम्न साहू और सरोज नायक के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस गैंग में कम से कम दो आरोपी राज्य के बाहर के थे, जिन्होंने एक पाकिस्तानी एजेंट के साथ मिलकर इस पूरे अवैध नेटवर्क को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
इस बड़े साइबर क्राइम और जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ सबसे पहले स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने किया था। एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए 12 मई 2023 को नयागढ़ से इस मामले के मुख्य आरोपी पठानी सामंत लेंका को गिरफ्तार किया। लेंका की गिरफ्तारी के बाद जब आगे की जांच की गई, तो विदेशी नेटवर्क और अवैध वित्तीय लेनदेन के कई चौंकाने वाले सबूत सामने आए, जिसके आधार पर बाकी के छह आरोपियों की भी धरपकड़ की गई। प्रशासन ने अदालत के इस फैसले को साइबर अपराधों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों के खिलाफ एक बड़ा कदम बताया है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिम कार्ड के उपयोग पर सख्त निगरानी और जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
