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भुवनेश्वर में सौर ऊर्जा से संचालित कुकिंग सिस्टम का सफल परीक्षण

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में वैज्ञानिकों ने एक सौर ऊर्जा से संचालित कुकिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह तकनीक गैस सिलेंडर पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगी। इस सिस्टम में सौर कॉइल और इंडक्शन कुकिंग तकनीक का अनूठा संयोजन है, जो 24 घंटे बिना रुकावट खाना पकाने की सुविधा प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक होटल और कैफे जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है।
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भुवनेश्वर में सौर ऊर्जा से संचालित कुकिंग सिस्टम का सफल परीक्षण

भुवनेश्वर में सौर ऊर्जा से संचालित कुकिंग सिस्टम

नई दिल्ली - मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण LPG की कमी और कीमतों में वृद्धि के बीच, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से एक सकारात्मक खबर आई है। अब खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा से संचालित एक आधुनिक कुकिंग सिस्टम विकसित किया है, जिसका सफल परीक्षण शुरू हो चुका है।


सौर और इंडक्शन का अनूठा संयोजन
ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (OUTR) के वैज्ञानिक सुधांशु शेखर साहू के नेतृत्व में विकसित इस सिस्टम में सौर कॉइल और इंडक्शन कुकिंग तकनीक का समावेश किया गया है। यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर निर्भर है, जिससे यह न केवल किफायती है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक सुरक्षित विकल्प बन गया है।


24 घंटे बिना रुकावट कुकिंग
इस तकनीक की विशेषता इसका डायरेक्ट करंट (DC) आधारित सिस्टम है। दिन के समय सौर पैनल से प्राप्त ऊर्जा सीधे कुकिंग में उपयोग होती है, जबकि रात में संग्रहित ऊर्जा को अल्टरनेटिंग करंट (AC) में परिवर्तित करके खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे 24 घंटे बिना रुकावट खाना पकाना संभव हो जाता है।


कैफे में सफल पायलट प्रोजेक्ट
भुवनेश्वर के ‘गोल्डन ब्रू कैफे’ में इस तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। यहां इस सिस्टम के माध्यम से बिरयानी और पुलाव जैसे व्यंजन कम समय में तैयार किए जा रहे हैं। आमतौर पर 2 किलोवाट का सोलर सेटअप पर्याप्त होता है, लेकिन अधिक उपयोग को देखते हुए कैफे में 3 किलोवाट का सिस्टम स्थापित किया गया है।


एक बार का निवेश, लंबे समय तक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सिस्टम में प्रारंभिक निवेश के बाद लंबे समय तक गैस के खर्च में कमी आ सकती है। खासकर होटल, ढाबों और कैफे जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए यह तकनीक काफी लाभकारी साबित हो सकती है।


तीन सदस्यीय टीम ने किया विकास
इस प्रोजेक्ट को वैज्ञानिक सुधांशु शेखर साहू ने डॉ. मनोज नायक (NIT) और ढेंकानाल के इलेक्ट्रिशियन संतोष स्वांई के सहयोग से विकसित किया है। उन्होंने पुराने कॉइल हीटिंग सिस्टम को, जो अधिक बिजली खपत के कारण बंद हो चुका था, अब DC आधारित बनाकर नए रूप में विकसित किया है।


पेटेंट और भविष्य की संभावनाएं
इस तकनीक के लिए 2021 में पेटेंट आवेदन किया गया था, जिसे 2024 में मंजूरी मिल चुकी है। वर्तमान में इस सिस्टम का प्रदर्शन OUTR के इनक्यूबेशन सेंटर में किया जा रहा है और इसकी लागत को और कम करने पर कार्य जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भुवनेश्वर जैसे शहरों में यह सौर कुकिंग तकनीक स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा के रूप में भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है।