मंगल ग्रह पर कनाडाई उपकरण एपीएक्सएस ने भेजे 3943 परिणाम
कनाडाई उपकरण का मंगल पर कार्य
कनाडा का अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) मंगल ग्रह की सतह पर लगातार कार्य कर रहा है। अब तक इसने 1761 नमूनों का विश्लेषण किया है और 3943 परिणाम पृथ्वी पर भेजे हैं। यह उपकरण नासा के क्यूरियोसिटी रोवर पर स्थापित है, जो लाल ग्रह की मिट्टी और चट्टानों का अध्ययन कर रहा है।
कनाडाई स्पेस एजेंसी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर एपीएक्सएस से जुड़ी जानकारी साझा की है। इस उपकरण की मदद से वैज्ञानिक यह जानने में सक्षम हो रहे हैं कि मंगल ग्रह की सतह किन तत्वों से बनी है और क्या वहां कभी जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां थीं।
एपीएक्सएस का आकार लगभग एक रूबिक क्यूब के समान है और यह क्यूरियोसिटी रोवर की रोबोटिक भुजा के सिरे पर स्थित है। जब रोवर किसी चट्टान या मिट्टी के नमूने के पास पहुंचता है, तो यह उपकरण उस पर एक्स-रे और अल्फा कणों की बौछार करता है। इसके बाद, नमूने से निकलने वाली ऊर्जा का अध्ययन कर वैज्ञानिक उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि एपीएक्सएस किसी नमूने में मौजूद सूक्ष्म तत्वों की पहचान करने में सक्षम है। विस्तृत विश्लेषण में इसे लगभग दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि त्वरित जांच केवल 10 मिनट में पूरी हो जाती है। यही कारण है कि यह उपकरण मंगल ग्रह पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी जुटा रहा है।
2024 में, एपीएक्सएस ने एक महत्वपूर्ण खोज में योगदान दिया था। क्यूरियोसिटी रोवर के एक चट्टान के ऊपर से गुजरने पर वह टूट गई थी, जिसमें वैज्ञानिकों को शुद्ध सल्फर के क्रिस्टल मिले। यह मंगल ग्रह पर पहली बार इस तरह के क्रिस्टल मिलने से वैज्ञानिकों में उत्साह है।
कनाडाई स्पेस एजेंसी ने बताया कि एपीएक्सएस दिन और रात दोनों समय कार्य कर सकता है। यह एक थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से संचालित होता है, जिससे क्यूरियोसिटी रोवर को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
1 फरवरी 2026 तक, क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर 36.2 किलोमीटर की दूरी तय की है। इस दौरान एपीएक्सएस ने हजारों वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये जानकारियाँ भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की तैयारी में मदद करेंगी।
कनाडा ने इस मिशन में अपनी भागीदारी मार्च 2029 तक बढ़ा दी है, जिससे आने वाले वर्षों में एपीएक्सएस से और भी महत्वपूर्ण खोजों की उम्मीद है।
