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मणिपुर में बम हमले के बाद न्याय की मांग, परिवार ने अनुग्रह राशि से किया इनकार

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में एक बम हमले ने दो बच्चों की जान ले ली, जिसके बाद परिवार ने अनुग्रह राशि लेने से इनकार कर दिया। दादा ओइनाम बाबूटन ने न्याय की मांग की है, जबकि मणिपुर में आक्रोश बढ़ रहा है। कोकोमी ने मोमबत्ती मार्च निकाला और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस घटना के बाद से इंफाल-तिद्दिम रोड पर बंद जारी है। जानें इस त्रासदी के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों के बारे में।
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मणिपुर में बम हमले के बाद न्याय की मांग, परिवार ने अनुग्रह राशि से किया इनकार

मणिपुर में बम हमले से मचा हड़कंप

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के त्रोंगलाबी में पिछले सप्ताह एक मैतेई परिवार के निवास पर हुए बम विस्फोट ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस हमले में दो छोटे बच्चों की जान चली गई। अब इस दुखद घटना ने एक नया मोड़ ले लिया है। मृत बच्चों के दादा, ओइनाम बाबूटन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उनका परिवार सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुग्रह राशि को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पैसे से किसी की जान वापस नहीं आ सकती और परिवार को न्याय की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। यह हमला 7 अप्रैल को तड़के लगभग एक बजे हुआ था।


अनुग्रह राशि से बेहतर है न्याय की मांग

ओइनाम बाबूटन ने बताया कि सरकार ने उन्हें अनुग्रह राशि देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन परिवार ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा, "अनुग्रह राशि से किसी की जान की भरपाई नहीं की जा सकती। दस-बीस लाख रुपये किसी को वापस नहीं ला सकते। हमें न्याय चाहिए।" उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस, एनआईए और फोरेंसिक टीमों ने मामले की जांच की, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। बच्चों की मां, जो हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिली थीं, अब अपने मायके चली गई हैं। दादा ने कहा कि उनका मन यहां नहीं लग रहा था, इसलिए वह अपने पैतृक घर लौट गई हैं।


कोकोमी का मोमबत्ती मार्च, न्याय की मांग

इस घटना के बाद मणिपुर में आक्रोश का माहौल बन गया है। बुधवार को कोकोमी (मणिपुर अखंडता समन्वय समिति) ने इंफाल पश्चिम जिले के लाम्बोईखोंगनांगखोंग राहत शिविर में एक मोमबत्ती मार्च का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों ने हमले के लिए "कुकी उग्रवादियों" को जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इससे पहले, 9 अप्रैल को ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (एएमयूसीओ) ने भी इंफाल में विरोध रैली का आयोजन किया था।


इंफाल-तिद्दिम रोड पर जारी है बंद, तनाव बरकरार

7 अप्रैल की इस घटना के बाद से इंफाल-तिद्दिम रोड पर पूर्ण बंद जारी है। बिष्णुपुर जिले में कई विरोध प्रदर्शन और हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि 7 अप्रैल को तड़के लगभग एक बजे संदिग्ध उग्रवादियों ने त्रोंगलाबी आवांग लेइकाई क्षेत्र में एक घर पर बम हमला किया था। इस हमले में एक पांच साल का लड़का और उसकी पांच महीने की बहन, जो सो रहे थे, मारे गए थे। उनकी मां भी घायल हुई थीं। अब परिवार और प्रदर्शनकारियों की एक ही मांग है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी घटना दोबारा न हो। इस समय पूरा मणिपुर इस त्रासदी के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों से जूझ रहा है।