मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का एक साल: कुकी समुदाय की शर्तें और चुनाव की अनिश्चितता
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का एक साल
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के एक वर्ष का समापन अगले महीने होने जा रहा है। इस दौरान भाजपा अब तक एक लोकप्रिय सरकार का गठन नहीं कर पाई है। विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी में होने वाले हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या राज्य में नई सरकार बनेगी या फिर चुनाव राष्ट्रपति शासन के तहत होंगे।
हाल ही में यह जानकारी मिली है कि कुकी समुदाय भी सरकार गठन के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने कुछ शर्तें रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मणिपुर को एक केंद्र शासित प्रदेश में परिवर्तित किया जाए।
इसका मतलब है कि कुकी समुदाय दिल्ली की तरह एक राज्य की मांग कर रहा है, जिसमें विधानसभा हो, लेकिन वह केंद्र शासित प्रदेश के रूप में कार्य करे। उप राज्यपाल को भूमि और कानून व्यवस्था के मामलों का प्रबंधन करना होगा।
कुकी समुदाय को यह भी समझ है कि जनसंख्या के अनुपात में हमेशा मैतेई समुदाय का बहुमत रहेगा और मुख्यमंत्री भी उसी समुदाय से होगा। यदि मणिपुर केंद्र शासित प्रदेश बनता है, तो कुकी और अन्य अल्पसंख्यक समूहों को कुछ राहत मिल सकती है, जिससे उन्हें मैतेई मुख्यमंत्री के कारण भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हालांकि, इस स्थिति में दोनों समुदायों के बीच सद्भाव बहाल होने की संभावना कम है। इससे तनाव और दूरी बनी रहेगी, जो स्थायी शांति की संभावनाओं को खतरे में डाल सकती है।
