मध्य पूर्व में तनाव: हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का कड़ा रुख
नई दिल्ली में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी खतरे के खोलने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान के सभी बिजली संयंत्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, जिसमें सबसे बड़ा पावर प्लांट भी शामिल है।
ईरान का कड़ा जवाब
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि यदि तेहरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो पूरे क्षेत्र की महत्वपूर्ण सुविधाएं हमेशा के लिए नष्ट हो सकती हैं। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी स्पष्ट किया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक ईरान के नष्ट हुए पावर प्लांट फिर से नहीं बन जाते। इस संकट ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने घोषणा की है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अब पूरी तरह से बंद रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमले के जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों वाले देशों की ऊर्जा, तकनीक और पानी से जुड़ी सुविधाएं कानूनी निशाने पर आ सकती हैं। 28 फरवरी को ईरान ने पहले ही इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को बंद कर दिया था, जिससे टैंकरों की आवाजाही रुक गई और तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं। ब्रेंट क्रूड की कीमत आज 119 डॉलर तक पहुँच गई थी, लेकिन अब यह 110 डॉलर के आसपास है।
हवाई हमलों में वृद्धि
21 मार्च से अमेरिका और इजरायल के हमले तेज हो गए हैं। तेहरान और ईरान के मध्य-दक्षिणी इलाकों में भारी बमबारी हुई है, खासकर हॉर्मुज के पास। ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी क्षेत्र पर मिसाइलें दागीं। आईडीएफ के अनुसार, युद्ध शुरू होने से अब तक ईरान ने 400 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिनमें से 92 प्रतिशत को हवा में ही रोक लिया गया। ईरान में 81,000 से अधिक नागरिकों के घर और इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि इजरायल में 2,700 से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
लेबनान में स्थिति
ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने तेल अवीव पर बार-बार रॉकेट हमले किए हैं। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों के साथ जमीनी कार्रवाई भी तेज की है। दोनों पक्षों के बीच हमलों में वृद्धि से युद्ध का दायरा और फैल गया है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में उछाल से ईंधन महंगा हो गया है और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा, तो वैश्विक संकट और गहरा हो सकता है।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य की आशंका
यह संघर्ष अब केवल सैन्य नहीं रह गया है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। तेल आपूर्ति पर खतरा मंडराने से कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं। दोनों पक्षों में नागरिकों का नुकसान हो रहा है। यदि ट्रंप का अल्टीमेटम लागू हुआ और ईरान ने हॉर्मुज बंद रखा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। दुनिया की नजरें अब अगले 48 घंटों पर टिकी हुई हैं।
